आज क्यों है भारत बंद? जाने ट्रेड यूनियनों की डिमांड लिस्ट

आज क्यों है भारत बंद? जाने ट्रेड यूनियनों की डिमांड लिस्ट
आज क्यों है भारत बंद? जाने ट्रेड यूनियनों की डिमांड लिस्ट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देशभर की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया है और इस हड़ताल में कई बैंक यूनियन भी शामिल हो रही हैं। बैंक हड़ताल के चलते जिस बैंक ब्रांच के कर्मचारी शामिल होंगे, वहां का कामकाज प्रभावित हो सकता है और इसके अलावा एटीएम में भी कैश की किल्लत हो सकती है।

Banking Transport Services May Be Hit Due To Trade Unions Strike On Jan 8 :

भारत बंद पर देश की सबसे बड़ी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से कहा गया कि हड़ताल में भाग लेने वाली यूनियनों में हमारे बैंक कर्मचारियों की सदस्यता बहुत कम है। ऐसे में बैंक के कामकाज पर हड़ताल का असर कम से कम होगा। जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा को डर है कि हड़ताल का असर उसके कामकाज पर पड़ेगा। बैंक ने कहा कि वह अपने ब्रांच के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित कर रहा है।

ट्रेड यूनियनों की मांग….

भारत बंद करने वाले ट्रेड यूनियन का दावा है कि केंद्र सरकार की ओर आर्थिक और जन विरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे लेबर लॉ का भी विरोध किया जा रहा है। स्टूडेंट यूनियन की ओर से शिक्षण संस्थानों में फीस बढ़ाने का विरोध किया जा रहा है।

यूनियन की कुछ अन्य मांगें…

  • आम लोगों की जरूरत वाली चीजों के बढ़ते दाम को काबू करना।
  • पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम, बेरोजगारी, महंगाई पर काबू पाने के लिए नीति बनाना।
  • मजदूरों की तन्ख्वाह बढ़ाना। यूनियन की मांग है कि यूनियन मजदूरों की न्यूनतम तन्ख्वाह 21 हजार रुपये प्रति माह होनी चाहिए।
  • सोशल हेल्थ सर्विस में खुद को शामिल करना
  • मजदूरों को मिड डे मील मिलना
  • 6000 रुपये की न्यूनतम पेंशन
  • पब्लिक सेक्टर बैंक के मर्जर का विरोध
  • बैंक यूनियन मर्जर प्लान के खिलाफ
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देशभर की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया है और इस हड़ताल में कई बैंक यूनियन भी शामिल हो रही हैं। बैंक हड़ताल के चलते जिस बैंक ब्रांच के कर्मचारी शामिल होंगे, वहां का कामकाज प्रभावित हो सकता है और इसके अलावा एटीएम में भी कैश की किल्लत हो सकती है। भारत बंद पर देश की सबसे बड़ी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से कहा गया कि हड़ताल में भाग लेने वाली यूनियनों में हमारे बैंक कर्मचारियों की सदस्यता बहुत कम है। ऐसे में बैंक के कामकाज पर हड़ताल का असर कम से कम होगा। जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा को डर है कि हड़ताल का असर उसके कामकाज पर पड़ेगा। बैंक ने कहा कि वह अपने ब्रांच के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित कर रहा है। ट्रेड यूनियनों की मांग.... भारत बंद करने वाले ट्रेड यूनियन का दावा है कि केंद्र सरकार की ओर आर्थिक और जन विरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे लेबर लॉ का भी विरोध किया जा रहा है। स्टूडेंट यूनियन की ओर से शिक्षण संस्थानों में फीस बढ़ाने का विरोध किया जा रहा है। यूनियन की कुछ अन्य मांगें...
  • आम लोगों की जरूरत वाली चीजों के बढ़ते दाम को काबू करना।
  • पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम, बेरोजगारी, महंगाई पर काबू पाने के लिए नीति बनाना।
  • मजदूरों की तन्ख्वाह बढ़ाना। यूनियन की मांग है कि यूनियन मजदूरों की न्यूनतम तन्ख्वाह 21 हजार रुपये प्रति माह होनी चाहिए।
  • सोशल हेल्थ सर्विस में खुद को शामिल करना
  • मजदूरों को मिड डे मील मिलना
  • 6000 रुपये की न्यूनतम पेंशन
  • पब्लिक सेक्टर बैंक के मर्जर का विरोध
  • बैंक यूनियन मर्जर प्लान के खिलाफ