बैंकों ने ताक पर रखे सरकारी नियम, ना शादी का कार्ड चला ना किसान क्रेडिट कार्ड

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद सरकार भले ही आम आदमी की सहूलियत के लिए हालातों पर रोज के रोज समीक्षा कर रही हो लेकिन दूसरी ओर जमीनी हालात ये है कि देश की 70 फीसदी आबादी को बैंकों के बाहर अपनी बारी आने का इंतजार आज भी कर रही है। इस 70 फीसदी आबादी में वह मेहनतकश आदमी शामिल है जिसके पास न तो बैंक में जमा करवाने के लिए नोटों के बंडल हैं और न ही बदलवाने को लाखों लाख रुपए। किसी को खाली पड़े खेतों को बोने के लिए बीज, खाद और पानी खरीदने की जरूरत है तो किसी को अपने बूढ़े पिता की दवा के लिए पुराने नोटों के बदले नए नोटों की।




वित्त मंत्रालय द्वारा दिए नए निर्देशों का पालन शुरूआती दो दिनों में अधिकांश बैंकों में नहीं हो सका। जो ग्राहक शादी का कार्ड और अपने किसान क्रेडिट कार्ड लेकर बैंक की लाइनों में लगकर भुगतान काउंटर तक पहुंचे तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बैंक में कैश की उपलब्धता की कमी का हवाला देकर ऐसे लोगों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। सरकार ने ऐसे ग्राहकों को ढ़ाई लाख रुपए और किसान क्रेडिट कार्ड पर 25 हजार तक एक मुश्त भुगतान की सीमा निर्धारित की है।




नोटबंदी की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा जाए तो सरकार ने लोगों की जरूरतों का ध्यान रखते हुए नियमों की समीक्षा जितनी तेजी से की, उतनी तत्पर्ता के साथ जमीनी स्तर पर प्रबंध पूरे नहीं हो पाए। दूर दराज के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को रोज बदल रहे नियमों की जानकारी मिलने में देर लग रही है। दूसरी ओर ऐसे इलाकों में बैंकों के पास रकम इतनी बड़ी मात्रा में नहीं पहुंच पा रही जिससे कि दिनभर में 300 या 400 लोगों को भी भुगतान किया जा सकें। जिस वजह से ऐसे इलाकों की बैंकों के बाहर भीड़ कम नहीं हो पा रही है।

बैंकों में नियमों के पालन की बात की जाए तो हर बैंक शाखा के कर्मी अपने उन नियमित ग्राहकों को प्राथमिकता पर सहूलियतें पहुंचा रहीं हैं जिनके भरोसे उनकी शाखा का कारोबार साल भर चलता है। ऐसे ग्राहकों को नियम के मुताबिक अधिकतम सीमा तक भुगतान किया जा रहा है। जबकि कभी—कभी बैंक पहुंचने वाले ग्राहकों को मौके के हिसाब से भुगतान देते हैं। बैंकों के पास नगदी की कमी होने पर नोट बदले जाने के लिए 4000 और 4500 की सीमा रहते हुए भी लोगों को 1000 से लेकर 2000 तक के भुगतान किए जाते रहे।




शहरों में हालात कुछ सुधरे हैं। यहां बैंकों के पास दिन में कई बार कैश पहुंचाए जाने का प्रबंध होने के साथ—साथ एटीएम की सुविधा में आए सुधार ने लोगों को राहत पहुंचाई है। 10 दिन बीत जाने के बाद लोगों को लगने लगा है कि अगले एक सप्ताह में शहरी जीवन ढ़र्रे पर लौटने लगेगा। शहरी लोगों के पास सरकार द्वारा रोज बदले जाने वाले नियमों की जानकारी भी है। जिसके चलते बैंक कर्मियों को भी सहूलियत रहती है।

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