खाते में मिनिमम बैलेंस न रखने के नाम पर बैंकों ने ग्राहकों को लगाया 5000 करोड़ का चूना

minimum balance penalty
खाते में मिनिमम बैलेंस न रखने के नाम पर बैंकों ने ग्राहकों को लगाया 5000 करोड़ का चूना

नई दिल्ली। बचत खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने के चार्ज के नाम पर देश की टॉप—5 बैंकों ने वित्तीय वर्ष 2017—18 में ग्राहकों से करीब पांच हजार करोड़ रूपए की वसूली की है। इसका खुलासा तब हुआ जब बीते शुक्रवार को लोकसभा में ये इस बारे में सवाल उठाया गया। इसका जबाव देते हुए जूनियर फाइनेंस मिनिस्टर शिव प्रताप शुक्ला ने बताया कि अब तक विभिन्न बैंकों ने पेनाल्टी के रूप में पांच हजार करोड़ रूपए की रिकवरी की है।

बता दें कि मिनिमम बैलेंस पेनाल्टी के नाम पर सबसे ज्यादा वसूली स्टेट बैंक आॅफ इण्डिया ने की है। आंकड़ों की मानें तो एसबीआई ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में करीब 2433 करोड़ रूपए की वसूली की है जबकि एचडीएफसी बैंक ने 590 करोड़, एक्सिस बैंक ने 530 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक ने 317 करोड़ और पंजाब नेशनल बैंक ने करीब 211 करोड़ रूपए वसूले है। इन आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा वित्तीय वर्ष में वसूली गई कुल पेनाल्टी में करीब 50 प्रतिशत एसबीआई, जबकि 30 प्रतिशत में देश की बड़ी बैंक मानी जाने वाली एक्सिस, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक की हिस्सेदारी है।

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बता दें पेनाल्टी के रूप में वसूली गई रकम इतनी ज्यादा होने की मुख्य वजह एसबीआई है। बैंक ने बीते कई वर्षों से मिनिमम बैलेंस पेनाल्टी नही ले रही थी, जो इस बात से शुरु कर दिया। जिसके चलते रकम काफी ज्यादा हो गयी। बता दें कि बैंकों ने खाते में मिनिमम बैलेंस रखने में असमर्थ लोगों के लिए जनधन योजना के तहर 30.8 करोड़ खाते खोले थे, इसके बावजूद भी पेनाल्टी मे इतनी बढ़ोत्तरी हो गई।

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नई दिल्ली। बचत खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने के चार्ज के नाम पर देश की टॉप—5 बैंकों ने वित्तीय वर्ष 2017—18 में ग्राहकों से करीब पांच हजार करोड़ रूपए की वसूली की है। इसका खुलासा तब हुआ जब बीते शुक्रवार को लोकसभा में ये इस बारे में सवाल उठाया गया। इसका जबाव देते हुए जूनियर फाइनेंस मिनिस्टर शिव प्रताप शुक्ला ने बताया कि अब तक विभिन्न बैंकों ने पेनाल्टी के रूप में पांच हजार करोड़ रूपए की रिकवरी की…
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