बिहार : एक ऐसी जेल, जहां कैदियों को रहने के लिए मिलता है 1 बीएचके फ्लैट

बक्सर। जेल का ख्याल दिमाग में आते दिमाग में ऐसी तस्वीर आती जहां इंसानों को जानवरों की तरह रखा जाता है। अमूमन होता भी ऐसा ही है। लेकिन बिहार में एक ऐसी जेल हैं, जहां कैदियों को रहने के लिए 1 बीएचके फ्लैट रहने को दिया जाता है, जहां वो अपने परिवार के चार सदस्यों के साथ रह सकता है। यहां कैदियों को सभी सुविधाएं मिलने के साथ ही वो बाहर आराम से बाहर भी निकलन सकते है।

Baxar Bihar Jail Prisenar Get 1 Bhk Flat Where They Lived With Family :

बता दें कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण पूरे बिहार की जेलों में बंद उन कैदियों का चुनाव मुक्त कारागार में रहने के लिए करता है, जो पेशेवर अपराधी ना हों या फिर किसी संगीन जुर्म में न सजा पाया हो। इस सुविधा के लिए प्राधिकरण द्वारा गठित बोर्ड तमाम​ बिंदुओं पर जांच करता है और फिर जेल अधीक्षक से परमिशन लेकर कैदी को उसके परिवार के साथ फ्लैट में रहने का आदेश देता है।

बताया जा रहा है कि बक्सर मुक्त कारागार अभी तक 102 फ्लैट बनाए गए है, जिनमें से 50 में मौजूदा समय में लोग रह रहे है। उनके साथ चार परिजन भी रहते है। जेल सूत्रों का कहना है कि 2 वर्षों में सैकड़ों कै​दी यहां से सजा काटकर जा चुके है। यहां रहने वालों कैदियों को भोजन भी गुणवत्तापूर्ण भी रहता है। यही नही सात दिन में अलग—अलग खाना दिया जाता है।

सजा पाने वाले बुजुर्ग कैदियों को रोज आधा लीटर दूध की भी व्यवस्था कराई जाती है। कैदी के साथ रहने वाले उसके परिजनों को अपने भोजन की व्यवस्था खुद करनी होती है। जिसके लिए वो जेल से बाहर जाकर किसी प्रकार का काम कर सकते हैं। इस जेल में रहने वाले कैदी वहां से पांच किलोमीटर के दायरे में जाकर काम करते है।

बता दें कि बक्सर केंद्रीय कारा देश की पुरानी जेलों में शुमार है। यहां स्वतंत्रता संग्राम से लेकर लोहिया के नेतृत्व में कांग्रेस हटाओ देश बचाओ आंदोलन और जेपी आंदोलन जैसे आंदोलनों में शामिल लोग रह चुके है। 23 मई 2012 मुख्यमंत्री ने बक्सर केंद्रीय कारा में मुक्त कारागार का उद्घाटन किया था। उद्घाटनके वक्त उन्होने बताया कि जेपी आंदोलन के वक्त उन्होने 15 दिन इस जेल में बिताए थे।

बक्सर। जेल का ख्याल दिमाग में आते दिमाग में ऐसी तस्वीर आती जहां इंसानों को जानवरों की तरह रखा जाता है। अमूमन होता भी ऐसा ही है। लेकिन बिहार में एक ऐसी जेल हैं, जहां कैदियों को रहने के लिए 1 बीएचके फ्लैट रहने को दिया जाता है, जहां वो अपने परिवार के चार सदस्यों के साथ रह सकता है। यहां कैदियों को सभी सुविधाएं मिलने के साथ ही वो बाहर आराम से बाहर भी निकलन सकते है। बता दें कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण पूरे बिहार की जेलों में बंद उन कैदियों का चुनाव मुक्त कारागार में रहने के लिए करता है, जो पेशेवर अपराधी ना हों या फिर किसी संगीन जुर्म में न सजा पाया हो। इस सुविधा के लिए प्राधिकरण द्वारा गठित बोर्ड तमाम​ बिंदुओं पर जांच करता है और फिर जेल अधीक्षक से परमिशन लेकर कैदी को उसके परिवार के साथ फ्लैट में रहने का आदेश देता है। बताया जा रहा है कि बक्सर मुक्त कारागार अभी तक 102 फ्लैट बनाए गए है, जिनमें से 50 में मौजूदा समय में लोग रह रहे है। उनके साथ चार परिजन भी रहते है। जेल सूत्रों का कहना है कि 2 वर्षों में सैकड़ों कै​दी यहां से सजा काटकर जा चुके है। यहां रहने वालों कैदियों को भोजन भी गुणवत्तापूर्ण भी रहता है। यही नही सात दिन में अलग—अलग खाना दिया जाता है। सजा पाने वाले बुजुर्ग कैदियों को रोज आधा लीटर दूध की भी व्यवस्था कराई जाती है। कैदी के साथ रहने वाले उसके परिजनों को अपने भोजन की व्यवस्था खुद करनी होती है। जिसके लिए वो जेल से बाहर जाकर किसी प्रकार का काम कर सकते हैं। इस जेल में रहने वाले कैदी वहां से पांच किलोमीटर के दायरे में जाकर काम करते है। बता दें कि बक्सर केंद्रीय कारा देश की पुरानी जेलों में शुमार है। यहां स्वतंत्रता संग्राम से लेकर लोहिया के नेतृत्व में कांग्रेस हटाओ देश बचाओ आंदोलन और जेपी आंदोलन जैसे आंदोलनों में शामिल लोग रह चुके है। 23 मई 2012 मुख्यमंत्री ने बक्सर केंद्रीय कारा में मुक्त कारागार का उद्घाटन किया था। उद्घाटनके वक्त उन्होने बताया कि जेपी आंदोलन के वक्त उन्होने 15 दिन इस जेल में बिताए थे।