तो इस वजह से रेलवे स्टेशनों पर लिखी रहती है समुंद्री तल से ऊंचाई

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तो इस वजह से स्टेशनों पर लिखी रहती है समुंद्री तल से उचाई

नई दिल्ली। भारत हर क्षेत्र में विश्व का सबसे विकसित देश साबित हो रहा है। भारतीय रेल एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और एकल सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। यहां रेलवे स्टेशनों की संख्या लगभग 8000 है। ये सारी बातें तो शायद आप जानते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर रेलवे स्टेशनों के बोर्ड पर समुद्र तल की ऊंचाई क्यों लिखी होती है?

Because Of This Reason Sea Level Distance Written On Railway Station :

हर छोटे बड़े स्टेशन पर पीले रंग का बोर्ड दिखाई देगा जिस पर शहर का नाम हिंदी, अंग्रेजी और कई बार उर्दू में लिखा दिख जाता है और स्टेशन के नाम के ठीक नीचे कुछ और भी लिखा रहता है। अगर आपने ध्यान दिया होगा तो आपको दिखा होगा कि इसी बोर्ड पर स्टेशन की समुद्र तल से ऊंचाई का भी उल्लेख रहता है।

दुनिया गोल है और इसे एक समान ऊंचाई पर नापने के लिए वैज्ञानिकों को किसी ऐसी बिंदु की जरूरत थी जो एक समान दिखे। लिहाजा इस मामले में समुद्र सबसे बेहतक विकल्प है, क्योंकि समुद्र का पानी एक समान रहता है। इसलिए लिखा जाता है समुद्र तल से ऊंचाई। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर रेलवे स्टेशनों पर इसको लिखने का क्या फायदा?

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जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे स्टेशनों पर समुद्र तल से ऊंचाई लिखने से यात्रियों को कोई फायदा नहीं होता। इसका फायदा ट्रेन के ड्राइवरों को होता है। मान लीजिए कि एक ट्रेन 100 मीटर समुद्र तल की ऊंचाई से 200 मीटर समुद्र तल की ऊंचाई पर जा रही है, तो ड्राइवर आसानी से यह निर्णय ले सकता है कि 100 मीटर की अधिक चढ़ाई चढ़ने के लिए उसे इंजन को कितना पावर देना होगा। साथ ही ट्रेन ढलान की ओर जाएगी तो नीचे आते वक्त ड्राइवर को कितना ब्रेक लगाना पड़ेगा या कितनी स्पीड बनाए रखने की जरूरत पड़ेगी, ये सब जानने के लिए ही स्टेशनों पर समुद्र तल की ऊंचाई लिखी जाती है।

इतना ही नहीं ‘समुद्र तल की ऊंचाई’ की मदद से ट्रेन के ऊपर लगे बिजली के तारों को एक समान ऊंचाई देने में भी मदद मिलती है, ताकि बिजली के तार ट्रेन के तारों से हर समय सटे रहें। रेलवे स्टेशनों पर समुद्र तल से ऊंचाई लिखने का ये भी एक फायदा है।

नई दिल्ली। भारत हर क्षेत्र में विश्व का सबसे विकसित देश साबित हो रहा है। भारतीय रेल एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और एकल सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। यहां रेलवे स्टेशनों की संख्या लगभग 8000 है। ये सारी बातें तो शायद आप जानते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर रेलवे स्टेशनों के बोर्ड पर समुद्र तल की ऊंचाई क्यों लिखी होती है? हर छोटे बड़े स्टेशन पर पीले रंग का बोर्ड दिखाई देगा जिस पर शहर का नाम हिंदी, अंग्रेजी और कई बार उर्दू में लिखा दिख जाता है और स्टेशन के नाम के ठीक नीचे कुछ और भी लिखा रहता है। अगर आपने ध्यान दिया होगा तो आपको दिखा होगा कि इसी बोर्ड पर स्टेशन की समुद्र तल से ऊंचाई का भी उल्लेख रहता है। दुनिया गोल है और इसे एक समान ऊंचाई पर नापने के लिए वैज्ञानिकों को किसी ऐसी बिंदु की जरूरत थी जो एक समान दिखे। लिहाजा इस मामले में समुद्र सबसे बेहतक विकल्प है, क्योंकि समुद्र का पानी एक समान रहता है। इसलिए लिखा जाता है समुद्र तल से ऊंचाई। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर रेलवे स्टेशनों पर इसको लिखने का क्या फायदा? indian railways जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे स्टेशनों पर समुद्र तल से ऊंचाई लिखने से यात्रियों को कोई फायदा नहीं होता। इसका फायदा ट्रेन के ड्राइवरों को होता है। मान लीजिए कि एक ट्रेन 100 मीटर समुद्र तल की ऊंचाई से 200 मीटर समुद्र तल की ऊंचाई पर जा रही है, तो ड्राइवर आसानी से यह निर्णय ले सकता है कि 100 मीटर की अधिक चढ़ाई चढ़ने के लिए उसे इंजन को कितना पावर देना होगा। साथ ही ट्रेन ढलान की ओर जाएगी तो नीचे आते वक्त ड्राइवर को कितना ब्रेक लगाना पड़ेगा या कितनी स्पीड बनाए रखने की जरूरत पड़ेगी, ये सब जानने के लिए ही स्टेशनों पर समुद्र तल की ऊंचाई लिखी जाती है। इतना ही नहीं 'समुद्र तल की ऊंचाई' की मदद से ट्रेन के ऊपर लगे बिजली के तारों को एक समान ऊंचाई देने में भी मदद मिलती है, ताकि बिजली के तार ट्रेन के तारों से हर समय सटे रहें। रेलवे स्टेशनों पर समुद्र तल से ऊंचाई लिखने का ये भी एक फायदा है।