इस वजह से होगा चुनावी नतीजे से पहले पेट्रोल के दामों में इजाफा

petrol
Because of this, the prices of petrol will be increased before the election results

नई दिल्ली। अक्सर ऐसा होता है कि चुनावी माहौल के दौरान पेट्रोल-डीजल के दामों में गिरावट आ जाती है। मगर इस बार चुनावी नतीजे से पहले ही पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसकी वजह ईरान से तेल पर लगा आयात प्रतिबंध होगा। जबकि भारत अभी ईरान से खाद्य सामग्री और औषधि के बदले ज़्यादातर कच्चे तेल का आयात करता रहा है।

Because Of This The Prices Of Petrol Will Be Increased Before The Election Results :

बता दें कि अमेरिकी फैसले के बाद से ईरान से तेल आयात पर रोक लगा दी गई है। जबकि अमेरिका ने खुद ‘फूड फॉर ऑयल’ नीति के तहत ही ईरान को तेल बेचने की इजाजत दी थी।

ट्रेड प्रोमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के विश्लेषक आशुतोष झा का कहना है कि “अभी तो भारत साल में करीब 80 अरब डॉलर का कच्चा तेल ईरान से बगैर नकदी चुकाये लेता है। इसके बदले खाद्य सामग्री और दवाइयों की आपूर्ति की जाती है। इस मैकेनिज्म के खत्म होने के बाद भारत को अन्य तेल उत्पादक देशों से आपूर्ति को समझौता करना होगा।” वहीं, 2 मई के बाद उसे अन्य विकल्पों के तौर पर नकद भुगतान करना पड़ सकता है।

साथ ही ये भी बताया कि किस देश से कितना तेल आयात बढ़ाया जाएगा, इस पर फैसला अभी नहीं हुआ है क्योंकि नए आपूर्तिकर्ता का चुनाव आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए किया जाएगा। हालांकि फैसला कुछ भी हो लेकिन ईरान के मुकाबले अन्य देशों से आने वाला कच्चा तेल हमें महंगा ही पड़ने वाला है।

इंडियन ऑयल के पूर्व अधिकारी ने बताया कि “अभी आयात होने वाले मध्यम और खराब फूड की रिफाइनिंग के लिए प्रमुख रिफाइनरियां तय हैं। नए आयात पर तेल की किस्म के आधार पर रिफाइनरी तय करनी पड़ेगी, जिसकी लागत कम या ज्यादा हो सकती है।”

नई दिल्ली। अक्सर ऐसा होता है कि चुनावी माहौल के दौरान पेट्रोल-डीजल के दामों में गिरावट आ जाती है। मगर इस बार चुनावी नतीजे से पहले ही पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसकी वजह ईरान से तेल पर लगा आयात प्रतिबंध होगा। जबकि भारत अभी ईरान से खाद्य सामग्री और औषधि के बदले ज़्यादातर कच्चे तेल का आयात करता रहा है। बता दें कि अमेरिकी फैसले के बाद से ईरान से तेल आयात पर रोक लगा दी गई है। जबकि अमेरिका ने खुद ‘फूड फॉर ऑयल’ नीति के तहत ही ईरान को तेल बेचने की इजाजत दी थी। ट्रेड प्रोमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के विश्लेषक आशुतोष झा का कहना है कि "अभी तो भारत साल में करीब 80 अरब डॉलर का कच्चा तेल ईरान से बगैर नकदी चुकाये लेता है। इसके बदले खाद्य सामग्री और दवाइयों की आपूर्ति की जाती है। इस मैकेनिज्म के खत्म होने के बाद भारत को अन्य तेल उत्पादक देशों से आपूर्ति को समझौता करना होगा।" वहीं, 2 मई के बाद उसे अन्य विकल्पों के तौर पर नकद भुगतान करना पड़ सकता है। साथ ही ये भी बताया कि किस देश से कितना तेल आयात बढ़ाया जाएगा, इस पर फैसला अभी नहीं हुआ है क्योंकि नए आपूर्तिकर्ता का चुनाव आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए किया जाएगा। हालांकि फैसला कुछ भी हो लेकिन ईरान के मुकाबले अन्य देशों से आने वाला कच्चा तेल हमें महंगा ही पड़ने वाला है। इंडियन ऑयल के पूर्व अधिकारी ने बताया कि "अभी आयात होने वाले मध्यम और खराब फूड की रिफाइनिंग के लिए प्रमुख रिफाइनरियां तय हैं। नए आयात पर तेल की किस्म के आधार पर रिफाइनरी तय करनी पड़ेगी, जिसकी लागत कम या ज्यादा हो सकती है।"