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बेहमई हत्याकांड: जब फूलन देवी ने लाइन में खड़ाकर 20 लोगों को मारी थी गोली

By शिव मौर्या 
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Behmai Massacre When Phoolan Devi Shot 20 People Standing In Line The Decision May Come Today

लखनऊ। बेहमई हत्याकांड के 39 साल बीत जाने के बाद आज इस मामले पर फैसला आ सकता है। कानपुर की एक स्थानीय अदालत आज इस मामले पर सुनवाई करेगी। बेहमई हत्याकांड की मुख्य दोषी फूलन देवी समेत कई आरोपियों की पहले ही मौत हो चुकी है। बता दें कि, 14 फरवरी 1981 को यूपी के कानपुर जिले के बेहमई में यह सब कुछ हुआ था। बताया जाता है कि दस्यु सुंदरी के नाम से विख्यात फूलन देवी ने एक ही समुदाय के 20 लोगों को एक लाइन में खड़ाकर ताबड़तोड़ गोलियां बरासकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था।

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इस वारदात के बाद यूपी की राजनीति में भूचाल आ गया था। गौरतलब है कि फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को यूपी के जालौन में हुआ था। दस वर्ष की उम्र में ही फूलन देवी अपने चाचा से जमीन विवाद का लेकर भिड़ गयीं थीं। इसके बाद फूलन की 10 साल की उम्र में शादी कर दी गई थी। हालांकि शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली। उम्र में 30 साल से अधिक बड़े पति ने दूसरी शादी कर ली। फूलन के नए दोस्‍त बने। उसमें से कुछ डाकू गैंग से थे। फूलन ने बताया था कि गैंग का सरदार बाबू गुज्जर और विक्रम मल्लाह को भी फूलन से प्यार हो गया था।

इसको लेकर विक्रम और बाबू गुज्जर के बीच तनातनी बढ़ गई थी, जिसके बाद विक्रम ने उसकी हत्या कर दी और गैंग का सरदान बन गया था। इसके बाद विक्रम के साथ फूलन रहने लगी थी। इसके बाद फूूलन अपने पति के गांव पहुंची और अपने गैंग के साथ पति और उसकी बीवी की जमकर पिटाई की थी। उधर, बाबू गुज्जर की हत्या से ठाकुरों का गैंग नाराज था। बाबू गुज्जर की हत्या का जिम्मेदार भी फूलन देवी को मना जाता था। इसके बाद दोनों गुटों में जमकर भिड़ंत हुई। इस दौरान मल्लाह और फूलन देवी कुछ देर आराम करने लगे, तभी मल्लाह को गोली लग गई।

वहीं, फूलन सोकर उठीं तो देखा कि वह ठाकुरों के गैंग की गिरफ्त में हैं। गैंग ने मल्‍लाह को मारकर फूलन को किडनैप कर लिया था। इसके बाद फूलन देवी के साथ काफी बर्बरात की गयी थी। यहां से छुटने के बाद फूलन देवी ने दोबारा डाकुओं का गैंग ज्वाइन कर लिया था। इसके बाद वह 1981 में बेहमई गांव लौटीं थीं, जहां उन्होंने बर्बरता करने वाले दो लोगों को पहचाना था, जिन्होंने उसका रेप किया था। बाकी के बारे में पूछा, तो किसी ने कुछ नहीं बताया। फूलन ने गांव से 20 ठाकुरों को निकालकर एक साथ गोली मार दी थी।

इस सनसीनखे हत्याकांड के बाद फूलन देवी का नाम मीडिया ने ‘बैंडिट क्वीन’ रख दिया था। हालांकि इसके बाद फूलन देवी ने मध्यप्रदेश के तत्कालीन सीएम के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। उस समय उन पर 22 हत्या, 30 डकैती और 18 अपहरण के चार्जेज थे। इसके बाद फूलन देवी को 11 वर्ष जेल में रहना पड़ा था। हालांकि 1993 में मुलायम सिंह यादव ने उन पर लगे सभी आरोप वापस लेने का फैसला लिया। राजनीतिक रूप से ये बड़ा फैसला था। 1994 में फूलन जेल से छूट गईं। उम्मेद सिंह से उनकी शादी हो गई।

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इसके बाद वह 1996 में सपा से चुनाव लड़ीं और मिर्जापुर से सांसद बनीं। चम्बल में घूमने वाली अब दिल्ली के अशोका रोड के शानदार बंगले में रहने लगी। 1998 में हार गईं, पर फिर 1999 में वहीं से जीत गईं। बताया जा रहा है कि 25 जुलाई 2001 नागपंचमी के दिन शेर सिंह राणा फूलन देवी से मिलने आया था। इस दौरान उसने फूलन देवी को गोली मार दी थी। बताया जाता है कि शेर सिंह राणा ने बेहमई हत्याकांड का बदला लिया है। हालांकि शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा हो गयी थी।

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