नींद न पूरी होने से आंखों के नीचे पड़ गए हैं काले गड्ढे? अपनाएं ये तरीके

नींद न पूरी होना , आंखों के नीचे पड़ गए हैं काले गड्ढे
नींद न पूरी होने से आंखों के नीचे पड़ गए हैं काले गड्ढे? अपनाएं ये तरीके

लखनऊ। नींद न पूरी होने की वजह से आर शरीर में रक्त संचार ठीक न होने की वजह से आंखों के आसपास की त्वचा ढीली पड़ने लगती है, जिसकी वजह से आँखों के किनारे काले घेरे दिखाई देने लगते हैं। अगर आप भी डार्क सर्कल से परेशान हैं, तो एक जादुई मुद्रा के अभ्यास से इन्हें ठीक किया जा सकता है। इसका प्रतिदिन एक महीने तक अभ्यास करने पर आप खुद अपने चेहरे पर फर्क महसूस कर पाएंगे।

Benefits Of Doing Makara Mudra :

यह है आसन

  • रक्त संचार ठीक न होने और पृथ्वी तत्व की कमी से आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स बनने लगते हैं।
  • मकर मुद्रा लौह-तत्व या रक्त की कमी को दूर कर डार्क सर्कल्स से मुक्ति दिलाती है।
  • यह मुद्रा एरोमाथेरेपी का काम करती है।
  • दाईं हथेली को बाईं हथेली के नीचे तिरछा करके रखें।
  • दाईं हथेली के अंगूठे को बाईं हथेली की कनिष्ठा और अनामिका उंगलियों के बीच से निकालकर बाईं हथेली के बीच में लगाएं। बाईं हाथ के अंगूठे और अनामिका के अग्रभाग को मिला लें। इसी प्रकार बाईं हाथ को भी नीचे रखकर यह मुद्रा बनाएं।
  • इसे धीमी-लंबी-गहरी सांस के साथ रोजाना 5 से 10 मिनट के लिए दिन में तीन बार दोनों हाथों से बारी-बारी से करें।
लखनऊ। नींद न पूरी होने की वजह से आर शरीर में रक्त संचार ठीक न होने की वजह से आंखों के आसपास की त्वचा ढीली पड़ने लगती है, जिसकी वजह से आँखों के किनारे काले घेरे दिखाई देने लगते हैं। अगर आप भी डार्क सर्कल से परेशान हैं, तो एक जादुई मुद्रा के अभ्यास से इन्हें ठीक किया जा सकता है। इसका प्रतिदिन एक महीने तक अभ्यास करने पर आप खुद अपने चेहरे पर फर्क महसूस कर पाएंगे। यह है आसन
  • रक्त संचार ठीक न होने और पृथ्वी तत्व की कमी से आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स बनने लगते हैं।
  • मकर मुद्रा लौह-तत्व या रक्त की कमी को दूर कर डार्क सर्कल्स से मुक्ति दिलाती है।
  • यह मुद्रा एरोमाथेरेपी का काम करती है।
  • दाईं हथेली को बाईं हथेली के नीचे तिरछा करके रखें।
  • दाईं हथेली के अंगूठे को बाईं हथेली की कनिष्ठा और अनामिका उंगलियों के बीच से निकालकर बाईं हथेली के बीच में लगाएं। बाईं हाथ के अंगूठे और अनामिका के अग्रभाग को मिला लें। इसी प्रकार बाईं हाथ को भी नीचे रखकर यह मुद्रा बनाएं।
  • इसे धीमी-लंबी-गहरी सांस के साथ रोजाना 5 से 10 मिनट के लिए दिन में तीन बार दोनों हाथों से बारी-बारी से करें।