आजादी के ‘नायक’ का आखिरी ख़त, हंसते हुए फांसी के तख्त पर चढ़ गये भगत

आजादी के नायकों में से एक शहीद भगत सिंह का आज 110वां जन्मदिवस है। आजादी की लड़ाई में भगत सिंह का योगदान और उनके कई चर्चित किस्से जिसने अंग्रेजों के जहन में खौफ पैदा कर दिया था। महज 23 साल की उम्र में उन्हे फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया गया, जिसे भगत सिंह ने हंसते हुए कबूल कर लिया। फांसी के तख्ते पर चढ़ने से पहले भगत सिंह ने देशवासियों के नाम एक ख़त लिखा था। उस खत ने आजादी की लड़ाई में चिंगारी का काम किया।

भगत सिंह ने अपने आखिरी ख़त में लिखा था, “साथियों स्वाभाविक है जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए। मैं इसे छिपाना नहीं चाहता, लेकिन एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि मैं कैद होकर या पाबंद होकर जीना नहीं चाहता। मेरा नाम हिन्दुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है। क्रांतिकारी दल के आदर्शों और कुर्बानियों ने मुझे बहुत ऊंचा उठा दिया है, इतना ऊंचा कि जीवित रहने की स्थिति में मैं इससे ऊंचा हरगिज नहीं हो सकता।”

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भगत सिंह ने आगे लिखा, “आज मेरी कमजोरियां जनता के सामने नहीं हैं। अगर मैं फांसी से बच गया तो वे जाहिर हो जाएंगी और क्रांति का प्रतीक चिन्‍ह मद्दम पड़ जाएगा या संभवत: मिट ही जाए, लेकिन दिलेराना ढंग से हंसते-हंसते मेरे फांसी चढ़ने की सूरत में हिंदुस्‍तानी माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरजू किया करेंगी और देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना साम्राज्‍यवाद या तमाम शैतानी शक्‍तियों के बूते की बात नहीं रहेगी।”

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को एक जाट सिख परिवार में ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले में बंगा गांव में किशन सिंह और विद्यावती के घर में हुआ था। क्रांती तो उन्हे जैसे विरासत में मिली थी। उनके जन्म के समय उनके पिता और दो चाचा, अजित सिंह और स्वर्ण सिंह जेल में थे, जिनको आजाद करने की बात चल रही थी, इन सभी बातों को भगत सिंह बड़े ध्यान से सुनते थे। जैसे जैसे भगत सिंह की उम्र बढ़ती गई , भगत सिंह के अंदर देश को आजाद करने और अंग्रेजो को देश से बाहर निकालने की भावना और भी तीव्र होने लगी।

जिस समय जलियाँवाला बाग हत्याकांड हुआ था, उस समय भगत सिंह की उम्र सिर्फ 12 साल थी। इस कांड की खबर मिलते है भगत सिंह अपने स्कूल से 12 मील पैदल चलकर जलियाँवाला बाग पहुँच गए थे। 14 साल की अम्र से ही उन्होने क्रांतीकारियों के समुहों में जुड़ना शुरु कर दिया था।

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