आज है भैरवनाथ को खुश करने का विशेष संयोग

नई दिल्ली: भैरव का अर्थ होता है भय का हरण कर जगत का भरण करने वाला। ऐसा भी कहा जाता है कि भैरव शब्द के तीन अक्षरों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्ति समाहित है। भैरव शिव के गण और पार्वती के अनुचर माने जाते हैं। हिंदू देवताओं में भैरव का बहुत ही महत्व है। भैरव एक पदवी है।




भैरव को भगवान् शिव के अन्य अनुचर, जैसे भूत-प्रेत, पिशाच आदि का अधिपति माना गया है। इनकी उत्पत्ति भगवती महामाया की कृपा से हुई है। भैरव को मानने वाले दो संप्रदाय में विभक्त हैं। पहला काल भैरव और दूसरा बटुक भैरव। भैरव काशी और उज्जैन के द्वारपाल हैं। उज्जैन में काल भैरव की जाग्रत प्रतीमा है जो मदीरापान करती है। इनके अतिरिक्त कुमाऊ मंडल में नैनीताल के निकट घोड़ाखाल में बटुक भैरव का मंदिर है जिन्हें गोलू देवता के नाम से जाना जाता हैं।

यूं तो भगवान भैरवनाथ को खुश करना बेहद आसान है लेकिन अगर वे रूठ जाएं तो मनाना बेहद मुश्किल। पेश है काल भैरव अष्टमी पर कुछ खास सरल उपाय जो निश्चित रूप से भैरव महाराज को प्रसन्न करेंगे। तंत्रसार के अनुसार भगवान शंकर के अवतारों में भैरवनाथ विशिष्ट महत्व रखते हैं। नाथ संप्रदाय की तांत्रिक पद्धति में भैरव को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। सोमवार को कालाष्टमी का आना शुभ संयोग है। भैरव उपायों के प्रयोग से व्यापार-व्यवसाय, जीवन में आने वाली कठिनाइयां, शत्रु पक्ष से आने वाली परेशानियां, विघ्न, बाधाएं, कोर्ट कचहरी आदि में जीत प्राप्त की जा सकती है बेशर्ते ये सब सूर्यास्त से लेकर आधी रात तक किया जाए।



यह तामसिक देवता हैं इसलिए इन्हें शराब बहुत प्रिय है लेकिन शाकाहार का अनुसरण करने वाले और वैष्णव इस विधि से उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं।
* दूध में दही, शहद और थोड़ा सिंदूर जब मिलाया जाता है तो इससे वैदिक मदिरा का निर्माण होता है। इसका भैरव बाबा को भोग लगाएं। आर्थिक समस्याओं का होगा अंत।
* वैज मांस का भोग लगाने के लिए उड़द में शहद, दही और सिंदूर मिलाएं। कोर्ट केस में मिलेगी सफलता।
इसके अतिरिक्त ये उपाय भी कर सकते हैं-
* भैरव जी का विधिवत पूजन कर उन्हें दही बड़े का भोग लगाकर किसी काले कुत्ते को खिलाएं।
* नीले रंग के फूल चढ़ाएं।
* उड़द से बने पकवान भैरव जी को भोग लगाएं।
* कड़वे तेल का दीपक लगाएं।
* इस मंत्र का करें जाप, भैरव बाबा लगाएंगे हर संकट से पार
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!