नोटबंदी के विरोध में किए गए भारत बंद का बिजनौर में नही दिखा असर

बिजनौर। नोट बंदी के विरोध में विपक्षियों की ओर से किए गए भारत बंद को बिजनौर ने आईना दिखाया। शहर बंद होना दूर की बात, व्यापारियों ने गली-मौहल्ले तक की दुकाने बंद नहीं की। व्यापारियों व अन्य लोगों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान खोलकर उन नेताओं को करारा जवाब दिया, जो नोट बंदी से आम लोगों को परेशानी होने का शोर मचाकर राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हुए हैं।

आठ नवंबर को देश के प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए एक हजार व पांच सौ के नोटों की वैद्यता समाप्त कर दी थी। नोट बंद होने से लोगों को नुकसान न हो, इसके लिए बैंकों व डाकघरों में इन नोटों को बदलने की व्यवस्था करने के साथ ही खातों में जमा करने का नियम जारी किया गया। हालांकि ये नोट अब बदलने बंद हो गए हैं और बैंकों व डाकघरों में 31 दिसंबर तक ही जमा हो पाएंगे, लेकिन इमानदारी से रूपए एकत्र करने वालों के लिए यह समय काफी है। मुश्किल में हैं तो वे लोग जिन्होंने काले धन के रूप में कुबैर का खजाना एकत्र किया हुआ है। ऐसे अधिकांश लोग अपने काले धन को सफेद बनाने के लिए प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन शासन व प्रशासन स्तर पर की जा रही सख्ती के चलते ये नोट ठिकाने नहीं लग पा रहे हैं। प्रधानमंत्री की एक घोषणा ने काले धन के राजाओं को रंक बना दिया है।




आतंकवादियों को होने वाली फंडिंग के अलावा जाली करेंसी पर भी प्रधानमंत्री के इस फैसले ने नकेल कस दी है। नोट बंदी से आने वाले दूरगामी परिणाम को देखते हुए देश की जनता बैंकों की लंबी लाइनों समेत तमाम मुश्किलें उठाने के बावजूद इस फैसले का समर्थन कर रही हैं, लेकिन विपक्ष में बैठी राजनीतिक पार्टियां नोट बंदी का दिल खोलकर विरोध कर रही हैं। विपक्ष में बैठे नेताओं को विरोध कर इस ऐतिहासिक फैसले को वापस लेने के लिए दबाव बनाने का और कोई रास्ता नहीं मिला, तो उन्होंने लोगों को हो रही परेशानी का हथियार बनाकर मोर्चा खोल दिया। देश की अधिकांश जनता नोट बंदी को सही बताते हुए कोई परेशानी न होने की बात कह रही है। इसके बावजूद विपक्षी फिर भी लोगों को ढाल बनाकर नोट बंदी पर प्रहार करने में लगे हैं, लेकिन अब लोग इन नेताओं को समझने लगे है कि काले धन पर प्रहार होने से सबसे ज्यादा दिक्कत किन्हे हो रही है। इसी का नतीजा है कि विपक्षियों की ओर से 28 नवंबर को किए गए भारत बंद के आह्वान को लोगों ने पूरी तरह आइना दिखा दिया।




दरअसल विपक्षी दलों ने एकजुट होकर भारत बंद कराने की रणनीति तैयार की थी। इसके लिए काफी प्रचार-प्रसार भी किया था, जबकि नोट बंदी के समर्थन में दूसरे गुट ने अपने-अपने प्रतिष्ठान खोलकर नोट बंदी के समर्थन को कहा था। सोमवार को जब भारत बंद का समय आया, तो नोट बंदी का विरोध कर रहे नेताओं पर नोट बंदी के समर्थक भारी पड़े। जिला मुख्यालय की बात करें तो शहर बंद होना दूर की बात गली-मौहल्ले तक की दुकाने पूरी तरह खुली रही। सर्राफा बाजार, मीना बाजार, सदर बाजार, बुल्ला का चौराहा, सिविल लाइन, स्कूल रोड, जानी का चौराहा व जजी मार्ग, हर तरह सारा माहौल सामान्य दिखा। शहरवासियों ने भारत बंद को पूरी तरह फ्लाप कर उन नेताओं को सबक सिखाया, जो लोगों की परेशानी का शोर मचाकर अपना हित साधने में लगे हैं।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट