सुनील मित्तल बोले, दूरसंचार क्षेत्र पर सिगरेट उद्योग की तरह बहुत ज्यादा टैक्स

सुनील मित्तल बोले, दूरसंचार क्षेत्र पर सिगरेट उद्योग की तरह बहुत ज्यादा टैक्स
सुनील मित्तल बोले, दूरसंचार क्षेत्र पर सिगरेट उद्योग की तरह बहुत ज्यादा टैक्स

नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के पुराने योद्धा सुनील भारती मित्तल ने गुरुवार को कहा कि बाजार में दूरसंचार कारोबार के नए समायोजन के चलते करीब 50 अरब के निवेश को बट्टे खाते में डालना पड़ा है और बड़ी संख्या में नौकरियां गई हैं। भारती एयरटेल के चेयरमैन मित्तल ने राजधानी में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में कहा कि देश के डिजिटल लक्ष्यों को पूरा करने में दूरसंचार क्षेत्र महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है पर इस क्षेत्र पर सिगरेट उद्योग की तरह बहुत अधिक कर लगाया गया है।

Bharti Airtel Boss Sunil Mittal Says Telecom Taxed Like Tobacco Sector :

मित्तल ने कहा, ‘भारत में मोबाइल सेवा प्रदाताओं द्वारा अर्जित किए जाने वाले हर 100 रुपये में से करीब 37 रुपये किसी ना किसी तरह के शुल्क के रूप में चले जाते हैं। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि यह विरोधाभास क्यों है … जहां एक तरफ प्रधानमंत्री डिजिटल भारत की बात करते हैं, जिसमें बहुत अधिक निवेश की जरूरत होती है, वहीं दूसरी तरफ हम स्पेक्ट्रम शुल्क और लाइसेंस शुल्क बहुत अधिक रखते हैं… और 18 प्रतिशत जीएसटी वसूला जाता है जो लगभग सबसे ऊंची दर है।’

मित्तल ने कहा कि पिछली नीति का भी और एनडीसीपी में भी शामिल व्यापक उद्येश्य में यह बात निहित है कि सरकार का राजस्व बढ़ाना ही कोई लक्ष्य नहीं है। ऐसे में सेवा प्रदाताओं और दूरसंचार विभाग राजस्व में बढ़ोतरी को लेकर मुकदमाबाजी क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिगरेट उद्योग की तरह इस (दूरसंचार) उद्योग पर भी बहुत अधिक कर रखा गया है। उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाए जाने की जरूरत पर बल दिया।

नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के पुराने योद्धा सुनील भारती मित्तल ने गुरुवार को कहा कि बाजार में दूरसंचार कारोबार के नए समायोजन के चलते करीब 50 अरब के निवेश को बट्टे खाते में डालना पड़ा है और बड़ी संख्या में नौकरियां गई हैं। भारती एयरटेल के चेयरमैन मित्तल ने राजधानी में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में कहा कि देश के डिजिटल लक्ष्यों को पूरा करने में दूरसंचार क्षेत्र महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है पर इस क्षेत्र पर सिगरेट उद्योग की तरह बहुत अधिक कर लगाया गया है। मित्तल ने कहा, 'भारत में मोबाइल सेवा प्रदाताओं द्वारा अर्जित किए जाने वाले हर 100 रुपये में से करीब 37 रुपये किसी ना किसी तरह के शुल्क के रूप में चले जाते हैं। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि यह विरोधाभास क्यों है ... जहां एक तरफ प्रधानमंत्री डिजिटल भारत की बात करते हैं, जिसमें बहुत अधिक निवेश की जरूरत होती है, वहीं दूसरी तरफ हम स्पेक्ट्रम शुल्क और लाइसेंस शुल्क बहुत अधिक रखते हैं... और 18 प्रतिशत जीएसटी वसूला जाता है जो लगभग सबसे ऊंची दर है।' मित्तल ने कहा कि पिछली नीति का भी और एनडीसीपी में भी शामिल व्यापक उद्येश्य में यह बात निहित है कि सरकार का राजस्व बढ़ाना ही कोई लक्ष्य नहीं है। ऐसे में सेवा प्रदाताओं और दूरसंचार विभाग राजस्व में बढ़ोतरी को लेकर मुकदमाबाजी क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिगरेट उद्योग की तरह इस (दूरसंचार) उद्योग पर भी बहुत अधिक कर रखा गया है। उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाए जाने की जरूरत पर बल दिया।