भारती एयरटेल ने दूरसंचार विभाग को 10,000 करोड़ रुपये का AGR बकाया चुकाया

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भारती एयरटेल ने दूरसंचार विभाग को 10,000 करोड़ रुपये का AGR बकाया चुकाया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद दिग्गज टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने सोमवार को 10,000 करोड़ रुपये के एजीआर बकाये का भुगतान दूरसंचार विभाग को कर दिया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वह बाकी की राशि का भुगतान भी सेल्फ इवैलुएशन के बाद कर देगी। एयरटेल की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारती एयरटेल, भारती हेक्साकॉम और टेलीनॉर की तरफ से कुल 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। 

Bharti Airtel Paid Agr Dues Of Rs 10000 Crore To Dot :

सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को अवमानना की चेतावनी दी थी

एजीआर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2019 को दूरसंचार विभाग के पक्ष में फैसला देते हुए टेलीकॉम कंपनियों को 23 जनवरी तक बकाया राशि चुकाने का आदेश दिया था। कंपनियों ने ब्याज और पेनल्टी में राहत की अपील करते हुए फैसले पर फिर से विचार करने की याचिका दायर की, लेकिन वह भी खारिज हो गई। इसके बाद भुगतान के लिए और समय देने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले शुक्रवार को यह अपील भी खारिज कर दी और टेलीकॉम कंपनियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए?

वोडाफोन-आइडिया पर 53,038 करोड़ रुपए बकाया

वोडाफोन-आइडिया ने शनिवार को कहा था कि वह आकलन कर रही है कि कितना भुगतान कर सकती है। वोडाफोन-आइडिया पर एजीआर के 53,038 करोड़ रुपए बकाया हैं। कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने पिछले दिनों यह भी कहा था कि भुगतान की राशि में छूट नहीं मिली तो कंपनी बंद करनी पड़ सकती है।

क्या है एजीआर ?

दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का तीन फीसदी स्पेक्ट्रम फीस और आठ फीसदी लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है। कंपनियां एजीआर की गणना दूरसंचार ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर करती थीं। ट्रिब्यूनल ने उस वक्त कहा था कि किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे गैर प्रमुख स्रोतों से हासिल राजस्व को छोड़कर बाकी प्राप्तियां एजीआर में शामिल होंगी। जबकि दूरसंचार विभाग किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त रकम को भी एजीआर में मानता है। इसी आधार पर वह कंपनियों से बकाया शुल्क की मांग कर रहा है।

किस कंपनी पर कितना बकाया?

पिछले साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को 90 दिनों के भीतर बकाया 92,000 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। कंपनियों पर एजीआर और ब्याद की रकम मिलाकर करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया है। गत 16 जनवरी को कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को खारीज कर दिया था।

वोडाफोन आइडिया- 53,038 करोड़ रुपये
रिलायंस जियो- 45,000 करोड़ रुपये
भारती एयरटेल- 25,586 करोड़ रुपये
टाटा टेलीकॉम- 13,823 करोड़ रुपये

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद दिग्गज टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने सोमवार को 10,000 करोड़ रुपये के एजीआर बकाये का भुगतान दूरसंचार विभाग को कर दिया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वह बाकी की राशि का भुगतान भी सेल्फ इवैलुएशन के बाद कर देगी। एयरटेल की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारती एयरटेल, भारती हेक्साकॉम और टेलीनॉर की तरफ से कुल 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।  सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को अवमानना की चेतावनी दी थी एजीआर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2019 को दूरसंचार विभाग के पक्ष में फैसला देते हुए टेलीकॉम कंपनियों को 23 जनवरी तक बकाया राशि चुकाने का आदेश दिया था। कंपनियों ने ब्याज और पेनल्टी में राहत की अपील करते हुए फैसले पर फिर से विचार करने की याचिका दायर की, लेकिन वह भी खारिज हो गई। इसके बाद भुगतान के लिए और समय देने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले शुक्रवार को यह अपील भी खारिज कर दी और टेलीकॉम कंपनियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए? वोडाफोन-आइडिया पर 53,038 करोड़ रुपए बकाया वोडाफोन-आइडिया ने शनिवार को कहा था कि वह आकलन कर रही है कि कितना भुगतान कर सकती है। वोडाफोन-आइडिया पर एजीआर के 53,038 करोड़ रुपए बकाया हैं। कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने पिछले दिनों यह भी कहा था कि भुगतान की राशि में छूट नहीं मिली तो कंपनी बंद करनी पड़ सकती है। क्या है एजीआर ? दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का तीन फीसदी स्पेक्ट्रम फीस और आठ फीसदी लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है। कंपनियां एजीआर की गणना दूरसंचार ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर करती थीं। ट्रिब्यूनल ने उस वक्त कहा था कि किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे गैर प्रमुख स्रोतों से हासिल राजस्व को छोड़कर बाकी प्राप्तियां एजीआर में शामिल होंगी। जबकि दूरसंचार विभाग किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त रकम को भी एजीआर में मानता है। इसी आधार पर वह कंपनियों से बकाया शुल्क की मांग कर रहा है। किस कंपनी पर कितना बकाया? पिछले साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को 90 दिनों के भीतर बकाया 92,000 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। कंपनियों पर एजीआर और ब्याद की रकम मिलाकर करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया है। गत 16 जनवरी को कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को खारीज कर दिया था। वोडाफोन आइडिया- 53,038 करोड़ रुपये रिलायंस जियो- 45,000 करोड़ रुपये भारती एयरटेल- 25,586 करोड़ रुपये टाटा टेलीकॉम- 13,823 करोड़ रुपये