बीएचयू मामले में चीफ प्रॉक्टर का इस्तीफा, वीसी के अधिकार छिने

बीएचयू मामले में चीफ प्रॉक्टर का इस्तीफा, वीसी के अधिकार छिने

वाराणसी : बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रा से हुई छेड़खानी घटना को लेकर हुए आंदोलन और आगजनी की घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो0 ओएन सिंह ने नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफा दे दिया है। जिसे मंजूर कर लिया गया है। वहीं दूसरी ओर केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी को विश्वविद्यालय की प्रशासनिक जिम्मेदारियां ठीक से न निभाने के चलते अधिकार हीन कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि कुलपति का कार्यकाल 26 नवंबर 2017 को पूरा हो रहा है, इसी के चलते उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।

बीएचयू में सामने आई घटना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि काशी हिदू विश्र्वविद्यालय (बीएचयू) की घटना के लिए अराजक तत्व जिम्मेदार हैं। प्रदेश सरकार पूरी सख्ती से घटना की जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

{ यह भी पढ़ें:- अब शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को मिलेगी 40 लाख की आर्थिक सहायता }

अब तक बीएचयू में हुई पूरी घटना कमिश्नर स्तरीय जांच हो चुकी है। जिसकी रिपोर्ट मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार को सौंपी जा चुकी है। इस रिपोर्ट में बीएचयू प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।

आपको बता दें कि बीएचयू में सामने आई छात्रा से छेड़छाड़ और फिर प्रशासन द्वारा घटना के प्रति संवेदनहीनता का दिखाया जाना और कैंपस के भीतर छात्राओं की सुरक्षा को सुनिश्चित ​किए जाने के लिए ठोस कदम न उठाए जाने के चलते, छात्राओं द्वारा अन्दोलन शुरू किया गया था। जिसमें कुछ बाहरी छात्रों और छात्र नेताओं के शामिल होने के चलते यह आंदोलन एकाएक हिंसक हो गया। जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज कर स्थिति को नियंत्रण में करना पड़ा यह पूरा घटना क्रम उसी समय हुआ, जब वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर आए थे। बीएचयू प्रशासन का कहना है कि प्रधानमंत्री के दौरे के समय छात्राओं का अंदोलन होना और कुलपति के आश्वासन के बाद भी छात्राओं का अंदोलन जारी रखना इस बात का संकेत देता है कि यह पूरी घटना एक तरह से राजनीतिक तौर पर प्रायोजित थी। जिसे दुर्भाग्यवश हुई छेड़छाड़ की घटना की आड़ में तूल दिया गया। इस पूरे आन्दोलन को बाहरी व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित​ किए जाने की जानकारी के बाद बीएचयू प्रशासन ने बातचीत करना उचित नहीं समझा।

{ यह भी पढ़ें:- CM योगी के गृह जनपद में गिरफ्तार हुई भाजपा महिला नेत्री, 50 हजार की रिश्वत लेने का आरोप }