BHU विवाद: डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का RSS ने किया समर्थन

firoz khan
BHU विवाद: डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का RSS ने किया समर्थन

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में नियुक्त हुए मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान का समर्थन किया है। लंका स्थित विश्व संवाद केंद्र में शुक्रवार को जिला, विभाग, प्रांत व क्षेत्र स्तर के पदाधिकारियों की बैठक में डॉ. फिरोज की नियुक्ति के विरोध से खुद को अलग करते हुए संघ ने इसे गलत माना है।

Bhu Controversy Rss Supports The Appointment Of Dr Feroze Khan :

करीब तीन घंटे तक चली बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने वैधानिक तरीके से हुई चयन प्रक्रिया के बाद केवल धर्म या संप्रदाय के आधार पर किसी का विरोध करने को अनुचित माना है। संघ का मानना है कि संस्कृत साहित्य को समर्पित व श्रद्धा भाव से पढ़ाने वाले योग्य शिक्षक का विरोध नहीं होना चाहिए। बैठक में संघ के सभी पदाधिकारियों ने कहा कि यह संस्कृत भाषा एवं साहित्य के प्रसार का प्रभाव है, जिसका लाभ संपूर्ण विश्व को मिलना चाहिए।

काशी प्रांत के विभाग संघचालक डॉ. जयप्रकाश लाल ने बताया कि वैधानिक चयन प्रक्रिया से नियुक्त किसी भी व्यक्ति का सांप्रदायिक आधार पर विरोध विधि विरुद्ध है। इस प्रकार का विरोध सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि संघ इस वृत्ति, प्रवृत्ति का विरोध करता है।

प्रोफेसर खान हिंदू जीवनशैली अपनाएं तो हम उन्हें अपना लेंगे: प्रदर्शनकारी छात्र

इससे पहले छात्रों ने कहा था कि वे प्रोफेसर खान का विरोध मुस्लिम होने की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे हिंदू रीति-रिवाजों से जीवन यापन नहीं करते। यह वेदों को पढ़ाने के लिए अहम है। शुक्रवार को न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में प्रदर्शन कर रहे छात्र ने कहा था कि अगर फिरोज खान विभाग में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें वेद पढ़ाने वाली जीवनशैली अपनानी चाहिए। हम उन्हें विभाग में शामिल कर लेंगे।

मीडिया में आलोचना के बावजूद प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने फिरोज खान की नियुक्ति पर विरोध जारी रखा था। छात्रों का कहना था कि अगर बीएचयू प्रशासन ने प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं रोकी, तो वे ऊपर तक जाएंगे।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में नियुक्त हुए मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान का समर्थन किया है। लंका स्थित विश्व संवाद केंद्र में शुक्रवार को जिला, विभाग, प्रांत व क्षेत्र स्तर के पदाधिकारियों की बैठक में डॉ. फिरोज की नियुक्ति के विरोध से खुद को अलग करते हुए संघ ने इसे गलत माना है। करीब तीन घंटे तक चली बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने वैधानिक तरीके से हुई चयन प्रक्रिया के बाद केवल धर्म या संप्रदाय के आधार पर किसी का विरोध करने को अनुचित माना है। संघ का मानना है कि संस्कृत साहित्य को समर्पित व श्रद्धा भाव से पढ़ाने वाले योग्य शिक्षक का विरोध नहीं होना चाहिए। बैठक में संघ के सभी पदाधिकारियों ने कहा कि यह संस्कृत भाषा एवं साहित्य के प्रसार का प्रभाव है, जिसका लाभ संपूर्ण विश्व को मिलना चाहिए। काशी प्रांत के विभाग संघचालक डॉ. जयप्रकाश लाल ने बताया कि वैधानिक चयन प्रक्रिया से नियुक्त किसी भी व्यक्ति का सांप्रदायिक आधार पर विरोध विधि विरुद्ध है। इस प्रकार का विरोध सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि संघ इस वृत्ति, प्रवृत्ति का विरोध करता है। प्रोफेसर खान हिंदू जीवनशैली अपनाएं तो हम उन्हें अपना लेंगे: प्रदर्शनकारी छात्र इससे पहले छात्रों ने कहा था कि वे प्रोफेसर खान का विरोध मुस्लिम होने की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे हिंदू रीति-रिवाजों से जीवन यापन नहीं करते। यह वेदों को पढ़ाने के लिए अहम है। शुक्रवार को न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में प्रदर्शन कर रहे छात्र ने कहा था कि अगर फिरोज खान विभाग में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें वेद पढ़ाने वाली जीवनशैली अपनानी चाहिए। हम उन्हें विभाग में शामिल कर लेंगे। मीडिया में आलोचना के बावजूद प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने फिरोज खान की नियुक्ति पर विरोध जारी रखा था। छात्रों का कहना था कि अगर बीएचयू प्रशासन ने प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं रोकी, तो वे ऊपर तक जाएंगे।