बीएचयू में गर्माया छात्रा की समलैंगिकता का मामला, प्रशासन का इंकार

BHU
बीएचयू में गर्माया छात्रा की समलैंगिकता का मामला, प्रशासन का इंकार

वाराणसी। देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के महिला महाविद्यालय के गर्ल्स छात्रावास से एक छात्रा को निष्कासित किए जाने के मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कुछ छात्र संगठनों का आरोप है कि निष्कासित छात्रा दिव्यांग थी और उसके ऊपर समलैंगिकता के आरोप लगाकर छात्रावास से निष्कासित कर दिया गया है। जबकि कालेज प्रशासन ने आरोपों को नकारते हुए इस पूरे मामले को बीएचयू के खिलाफ दुष्प्रचार करार दिया है।

Bhu Facing Allegation Over Homosexuality Discrimination With Girl Student :

महाविद्यालय प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक निष्कासित की गई छात्रा के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रहीं थीं। वह छात्रावास में रहने वाली अन्य छात्राओं को आत्महत्या कर लेने की बात कहकर परेशान करती थी। छात्रावास प्रशासन ने छात्राओं की शिकायत पर आरोपी छात्रा को अलग अलग छात्रावासों में स्थानांतरित किया लेकिन सभी छह छात्रावासों से उसके खिलाफ 15 से ज्यादा शिकायतें सामने आईं। ​इन शिकायतों के आधार पर ही छात्रावास प्रशासन ने आरोपी छात्रा के माता—पिता को बुलाकर उनसे बात की। छात्रावास प्रशासन की ओर से अभिवावकों को छात्रा के इलाज के बाद ही उसे छात्रावास में वापस लिए जाने का आश्वासन दिया गया है।

वहीं कहा जा रहा है कि बीएचयू के महिला महाविद्यालय की ओर से इससे पूर्व यह भी कहा गया था कि छात्रा अपनी अन्य सहपाठियों के साथ समलैंगिक व्यवहार करती थी। जिस वजह से अन्य छात्राओं को परेशानी हो रही थी। छात्राओं की शिकायत को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय प्रशासन ने छात्रा को छात्रावास से निष्कासित किया है, न कि महाविद्यालय से।

दिव्यांग है निष्कासित छात्रा —

महाविद्यालय के छात्रावास में रहने वाली छात्राओं में एक गुट का आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन ने दिव्यांग छात्रा के साथ नरमी से पेश आना था। छात्रा को आंखों से संबन्धित विकलांगता थी, जिस वजह से अन्य सहपाठियों को उसके व्यवहार से पेरशानी होती थी। वास्तविकता में समलैंगिकता जैसा कुछ भी नहीं था। प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए छात्रा को बाहर कर दिया।

वाराणसी। देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के महिला महाविद्यालय के गर्ल्स छात्रावास से एक छात्रा को निष्कासित किए जाने के मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कुछ छात्र संगठनों का आरोप है कि निष्कासित छात्रा दिव्यांग थी और उसके ऊपर समलैंगिकता के आरोप लगाकर छात्रावास से निष्कासित कर दिया गया है। जबकि कालेज प्रशासन ने आरोपों को नकारते हुए इस पूरे मामले को बीएचयू के खिलाफ दुष्प्रचार करार दिया है।महाविद्यालय प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक निष्कासित की गई छात्रा के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रहीं थीं। वह छात्रावास में रहने वाली अन्य छात्राओं को आत्महत्या कर लेने की बात कहकर परेशान करती थी। छात्रावास प्रशासन ने छात्राओं की शिकायत पर आरोपी छात्रा को अलग अलग छात्रावासों में स्थानांतरित किया लेकिन सभी छह छात्रावासों से उसके खिलाफ 15 से ज्यादा शिकायतें सामने आईं। ​इन शिकायतों के आधार पर ही छात्रावास प्रशासन ने आरोपी छात्रा के माता—पिता को बुलाकर उनसे बात की। छात्रावास प्रशासन की ओर से अभिवावकों को छात्रा के इलाज के बाद ही उसे छात्रावास में वापस लिए जाने का आश्वासन दिया गया है।वहीं कहा जा रहा है कि बीएचयू के महिला महाविद्यालय की ओर से इससे पूर्व यह भी कहा गया था कि छात्रा अपनी अन्य सहपाठियों के साथ समलैंगिक व्यवहार करती थी। जिस वजह से अन्य छात्राओं को परेशानी हो रही थी। छात्राओं की शिकायत को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय प्रशासन ने छात्रा को छात्रावास से निष्कासित किया है, न कि महाविद्यालय से।दिव्यांग है निष्कासित छात्रा —महाविद्यालय के छात्रावास में रहने वाली छात्राओं में एक गुट का आरोप है कि महाविद्यालय प्रशासन ने दिव्यांग छात्रा के साथ नरमी से पेश आना था। छात्रा को आंखों से संबन्धित विकलांगता थी, जिस वजह से अन्य सहपाठियों को उसके व्यवहार से पेरशानी होती थी। वास्तविकता में समलैंगिकता जैसा कुछ भी नहीं था। प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए छात्रा को बाहर कर दिया।