येँ होंगे छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री, कल लेंगे शपथ

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येँ होंगे छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री, कल लेंगे शपथ

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा हो गई है और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र बघेल राज्य के मुख्यमंत्री होंगे वो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 15 साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी की है। 90 सीटों वाले सूबे में 68 सीट हासिल कर कांग्रेस ने प्रचंड जीत हासिल की है। 1961 में किसान परिवार में पैदा हुए भूपेश बघेल ने 1986 में भारतीय युवा कांग्रेस में शामिल होकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बघेल ने कांग्रेस की कमान ऐसे समय में संभाली जब पार्टी कई मोर्चों पर संकट से गुजर रही थी।

Bhupesh Bhaghel Is New Chief Minister Of Chhattisgarh :

अजीत जोगी को बाहर का रास्ता दिखाया

भूपेश बघेल को ऐसे वक्त में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली, जब राज्य में कांग्रेस के बड़े नेताओं का अभाव था। झीरम घाटी में अपने बड़े नेताओं की मौत के बाद बघेल ने कांग्रेस को नेतृत्व संकट से निकाला। एक समय बीजेपी की बी टीम कही जाने वाले अजीत जोगी और उनके बेटे अजीत जोगी तक को उन्होंने पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा कर अपने रुख से स्पष्ट कर दिया था कि वह कांग्रेस को मजबूत करने में किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे।

चर्चित सीडी कांड में जेल जा चुके बघेल 

जैसे-जैसे भूपेश बघेल का हमला रमन सरकार पर बढ़ता गया, वैसे ही बघेल और उनके परिवार पर कई तरह के मुकदमें भी लदें। हाल ही में रमन सिंह सरकार के मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित सेक्स सीडी के मामले में जब भूपेश बघेल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, तब उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया। लेकिन बाद में आलाकमान के कहने पर वे बेल पर रिहा हुए और चुनाव की कमान संभाली। बघेल के इस रुख ने उनकी छवि उस योद्धा के तौर बनाई जो किसी भी तरह के दबाव में झुकने वाला नहीं था।

कुर्मी जाति का खासा प्रभाव

एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले बघेल राज्य में राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम कुर्मी जाति से आते हैं। कांग्रेस का प्रदर्शन भी छत्तीसगढ़ की ओबीसी बेल्ट में खासा अच्छा रहा। मौजूदा सांसद और कांग्रेस के ओबीसी सेल के अध्यक्ष ताम्रध्वज साहू ने भी साहू समुदाय को कांग्रेस की तरफ लाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि कुर्मी समुदाय को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और बघेल साल 1993 से ही मानव कुर्मी क्षत्रीय समाज के संरक्षक रहे हैं। राज्य में कुर्मी और साहू समुदाय कुल आबादी का 36 फीसदी है जो किसी भी दल को जीत दिलाने के लिए काफी हैं।

जातीय गणित के अलावा भूपेश बघेल की जो सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि वो यह है कि जब ऐसा माना जा रहा था कि जोगी फैक्टर के चलते बीजेपी एक बार फिर सरकार बना लेगी, तब बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल कर सियासी पंडितों को हैरान कर दिया।

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा हो गई है और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र बघेल राज्य के मुख्यमंत्री होंगे वो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 15 साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी की है। 90 सीटों वाले सूबे में 68 सीट हासिल कर कांग्रेस ने प्रचंड जीत हासिल की है। 1961 में किसान परिवार में पैदा हुए भूपेश बघेल ने 1986 में भारतीय युवा कांग्रेस में शामिल होकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बघेल ने कांग्रेस की कमान ऐसे समय में संभाली जब पार्टी कई मोर्चों पर संकट से गुजर रही थी।

अजीत जोगी को बाहर का रास्ता दिखाया

भूपेश बघेल को ऐसे वक्त में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली, जब राज्य में कांग्रेस के बड़े नेताओं का अभाव था। झीरम घाटी में अपने बड़े नेताओं की मौत के बाद बघेल ने कांग्रेस को नेतृत्व संकट से निकाला। एक समय बीजेपी की बी टीम कही जाने वाले अजीत जोगी और उनके बेटे अजीत जोगी तक को उन्होंने पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा कर अपने रुख से स्पष्ट कर दिया था कि वह कांग्रेस को मजबूत करने में किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे।

चर्चित सीडी कांड में जेल जा चुके बघेल 

जैसे-जैसे भूपेश बघेल का हमला रमन सरकार पर बढ़ता गया, वैसे ही बघेल और उनके परिवार पर कई तरह के मुकदमें भी लदें। हाल ही में रमन सिंह सरकार के मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित सेक्स सीडी के मामले में जब भूपेश बघेल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, तब उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया। लेकिन बाद में आलाकमान के कहने पर वे बेल पर रिहा हुए और चुनाव की कमान संभाली। बघेल के इस रुख ने उनकी छवि उस योद्धा के तौर बनाई जो किसी भी तरह के दबाव में झुकने वाला नहीं था।

कुर्मी जाति का खासा प्रभाव

एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले बघेल राज्य में राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम कुर्मी जाति से आते हैं। कांग्रेस का प्रदर्शन भी छत्तीसगढ़ की ओबीसी बेल्ट में खासा अच्छा रहा। मौजूदा सांसद और कांग्रेस के ओबीसी सेल के अध्यक्ष ताम्रध्वज साहू ने भी साहू समुदाय को कांग्रेस की तरफ लाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि कुर्मी समुदाय को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और बघेल साल 1993 से ही मानव कुर्मी क्षत्रीय समाज के संरक्षक रहे हैं। राज्य में कुर्मी और साहू समुदाय कुल आबादी का 36 फीसदी है जो किसी भी दल को जीत दिलाने के लिए काफी हैं। जातीय गणित के अलावा भूपेश बघेल की जो सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि वो यह है कि जब ऐसा माना जा रहा था कि जोगी फैक्टर के चलते बीजेपी एक बार फिर सरकार बना लेगी, तब बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल कर सियासी पंडितों को हैरान कर दिया।