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जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस को बड़ा झटका , डॉ. कर्ण सिंह के बेटे ने दिया इस्तीफा

'द कश्‍मीर फाइल्‍स' (The kashmir Files) फिल्‍म आने के बाद से जम्‍मू-कश्‍मीर में कश्‍मीरी पंडितों के विस्‍थापन मुद्दा गर्माया हुआ है। इसके बीच मंगलवार को जम्‍मू-कश्‍मीर के महाराजा हरी सिंह के पोते यानि कांग्रेस के सीनियर डॉ. कर्ण सिंह (Sr Congress leader Dr. Karan Singh) के बेटे विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) ने पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया है। उन्‍होंने अपना इस्‍तीफा कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को भेजा है। विक्रमादित्य सिंह ने अपने इस्‍तीफे को ट्वीट करके शेयर भी किया है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। ‘द कश्‍मीर फाइल्‍स’ (The kashmir Files) फिल्‍म आने के बाद से जम्‍मू-कश्‍मीर में कश्‍मीरी पंडितों के विस्‍थापन मुद्दा गर्माया हुआ है। इसके बीच मंगलवार को जम्‍मू-कश्‍मीर के महाराजा हरी सिंह के पोते यानि कांग्रेस के सीनियर डॉ. कर्ण सिंह (Sr Congress leader Dr. Karan Singh) के बेटे विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) ने पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया है। उन्‍होंने अपना इस्‍तीफा कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को भेजा है। विक्रमादित्य सिंह ने अपने इस्‍तीफे को ट्वीट करके शेयर भी किया है।

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विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) ने ट्वीट में कहा है कि जम्मू-कश्मीर के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर मेरी स्थिति जो राष्ट्रीय हितों को दर्शाती है, कांग्रेस के साथ अलाइन नहीं है। पार्टी जमीनी वास्तविकताएं से कटी हुई है। बता दें कि विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) जम्मू व कश्मीर विधान परिषद के सदस्‍य रह चुके हैं।

विक्रमादित्य सिंह ने आज अपने बयान में कहा कि कांग्रेस पार्टी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों की भावनाओं और आकांक्षाओं को महसूस करने और समझने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी जमीनी हकीकत से बेखबर है और न केवल जम्मू-कश्मीर में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उभरते परिदृश्यों को बनाए रखने के लिए आवश्यक संगठनात्मक और अन्य परिवर्तन करने में असमर्थ है।

2018 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने कई मुद्दों या घटनाओं के समर्थन में खुलकर अपने विचार व्यक्त किए हैं। जो कांग्रेस पार्टी के रुख से मेल नहीं खाते हैं। इसमें पीओजेके में बालाकोट हवाई हमले, जम्मू-कश्मीर में ग्राम रक्षा समितियों (वीडीसी) का पुन: सशक्तिकरण, अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाना, लद्दाख यूटी का गठन, गुप्कर गठबंधन की निंदा और जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया/मसौदे के लिए समर्थन शामिल है।

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