यूपी: स्वास्थ्य विभाग के फर्जी शासनादेश पर मैनपॉवर कंपनी ने 7 जिलों में कर डालीं संविदा भर्तियां

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यूपी: स्वास्थ्य विभाग के फर्जी शासनादेश पर मैनपॉवर कंपनी ने 7 जिलों में कर डालीं संविदा भर्तियां

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से 13 जुलाई 2018 को जारी हुए एक फर्जी शासनादेश ने 7 जिलों में संविदा भर्ती के नाम पर बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम दिया है। इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग के शासन स्तर के बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की जानकारी सामने आने के बावजूद विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। हद तो इस बात की है कि इस मामले के हाईकोर्ट में पहुंचने से पूरे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है लेकिन वाबजूद इसके कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं करवाई गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में खाली पड़े पदों के लिए ठेके पर भर्ती करने के लिए मैनपॉवर एजेंसीज के सिलेक्शन के लिए ई-टेंडरिंग के माध्यम से निविदाएं मांगी थी। ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया के बीच में ही स्वास्थ्य विभाग के अनु सचिव शिव गोपाल सिंह के हस्ताक्षर के साथ 13 जुलाई 2018 को एक शासनादेश जारी कर महानिदेशक कार्यालय व अन्य अधीनस्थ अधिकारियों को, अल्फा टू ओमेगा फाइनेंसियल सर्विसेज नामक निजी एंजेंसी को पीलीभीत, संभल, लखीमपुर खीरी, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ और अलीगढ़ में रिक्त पद भरे जाने के लिए नामित करने का आदेश दिया गया।

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यह शासनादेश विभागीय पोर्टल के माध्यम से भी प्रकाशित किए जाने के साथ—साथ इन सभी जिलों के सीएमओ को भी प्रेषित किया गया। इसी शासनादेश के आधार पर इन जिलों के सीएमओ ने अल्फा टू ओमेगा फाइनेंसियल सर्विसेज को आर्डर देकर तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम किया। जिसकी पुष्टि करने के लिए टीम पर्दाफाश ने इन जिलों के सीएमओ से संपर्क किया, जिसमें वह सीधे कुछ न कहने के बजाय गोलमोल जवाब देते नजर आए जबकि कुछ जिलों के सीएमओ से संपर्क नहीं हो पाया।

वहीं जौनपुर के सीएमओ डॉ0 रामजी पांडे से फोन पर हुई बातचीत के दौरान बताया कि उक्त कंपनी के लोग शासनादेश लेकर उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने ऊपर से भर्ती की शर्तों के विषय में दिशा निर्देश प्राप्त न होने का हवाला देकर आॅर्डर देने से इंकार कर दिया। डॉ. पांडे ने बताया कि कंपनी के लोगों के साथ कुछ स्थानीय लोग भी उनसे मिलने पहुंचे थे, जिनके विषय में उन्हें पहले से जानकारी थी, इसलिए वह शासनादेश समझ कर ही उन लोगों की नियत को भांप गए थे।

शासन की कंप्यूटर सेल से अपलोड़ और मेल किया गया शासनादेश-

अल्फा टू ओमेगा फाइनेंसियल सर्विसेज को नामित करने वाले शासनादेश को प्रमुख ​सचिव स्वास्थ्य के अधीनस्थ आने वाली उसी कंप्यूटर से अपलोड और मेल किया गया है, जहां से विभाग के अ​न्य शासनादेश पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं। वहीं इस शासनादेश पर हस्ताक्षर करने वाले अनु सचिव शिव गोपाल सिंह की भूमिका भी इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध नजर आती है, जो तीन माह की ट्रेनिंग पर गए बताए जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण के अदालत में पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के हाथ पांव तो फूल गए हैं, लेकिन मंशा अब तक सवालों के घेरे में है, क्योंकि अभी तक विभाग की ओर से इस प्रकरण में किसी प्रकार की कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।

कैसे हुआ खुलासा –

स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश भर में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के रिक्त पड़े पदों पर संविदा भर्ती के लिए ई निविदा ​निकाली गई थी। ई टेंडरिंग की प्रक्रिया में शामिल हुई मैन पॉवर कंपनियों को निविदा खुलने से पहले ही एक कंपनी को सात जिलों में भर्ती करने के लिए नामित किए जाने का शासनादेश जारी होने की जानकारी मिलने के बाद इस प्रकरण को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है।

प्रमुख सचिव ने दिए जांच के विभागीय आदेश –

इस पूरे मामले में टीम पर्दाफाश ने प्रमुख सचिव चिकित्सा प्रशांत त्रिवेदी से बात की तो उन्होंने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। जिसकी जांच के आदेश उनके द्वारा जारी किए जा चुके हैं। डॉ. नीजर शुक्ला विशेष सचिव को जांच अधिकारी नामित किया गया है। इससे अधिक कोई भी जानकारी देने से उन्होंने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया।

मैनपॉवर एजेंसियों के भ्रष्टाचार पर प्रमुख सचिव ने भरी हामी –

टीम पर्दाफाश द्वारा प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी से जब मैन पॉवर एजेंसियों के द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार के बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने बताया कि पूरा प्रकरण उनकी जानकारी में है। विभाग में पहले से मैन पॉवर सप्लाई कर रही कंपनी अवनि परिधि का नाम आने के बाद प्रमुख सचिव बेहद असहज नजर आए और जल्द ही मैन पॉवर एजेंसियों के काकस को तोड़ने के बात कहते नजर आए। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह स्वास्थ विभाग के मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन के माध्यम से संविधा भर्तियां करने का काम करेंगे।

आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग में मैन पॉवर सप्लाई करने वाली कंपनी अवनि परिधि यूपीएसआईसी में ब्लैक लिस्टेड है। यूपीएसआईसी द्वारा इस कंपनी को अन्य विभागों में भी ब्लैक लिस्ट करने की सिफारिश की है, जिनमें स्वास्थ विभाग भी शामिल है। बताया जाता है कि इस कंपनी को स्वास्थ विभाग के ​कुछ अधिकारियों और विभागीय मंत्री का संरक्षण प्राप्त है। प्रदेश की निर्वासित सरकार में भी यह कंपनी मैनपॉवर सप्लाई में बड़े स्तर पर सक्रिय थी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से 13 जुलाई 2018 को जारी हुए एक फर्जी शासनादेश ने 7 जिलों में संविदा भर्ती के नाम पर बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम दिया है। इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग के शासन स्तर के बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की जानकारी सामने आने के बावजूद विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। हद तो इस बात की है कि इस मामले के हाईकोर्ट में पहुंचने…
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