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बिहार चुनाव : यह बड़े चेहरे चुनाव में डालेंगे कितना असर, इस बार किसकी होगी ताजपोशी…

Bihar Election How Big Faces Will Make An Impact In The Election Whose Will This Coronation Be Crowned

By शिव मौर्या 
Updated Date

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है। तीन चरणों में बिहार विधानसभा का चुनाव होना है। तीन चरणों में होने वाली इस चुनाव में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को वोटिंग होगी। 243 सदस्यीय विधानसभा के नतीजे 29 नवंबर को खत्म होने जा रहे विधानसभा के कार्यकाल से करीब तीन हफ्ते पहले यानी 10 नवंबर को आ जाएंगे। कोरोना संकट में हो रहा चुनाव किसके लिए फायदेमंद साबित होगा यह तो भविष्य तय करेगा। हालांकि, कई बड़े चेहरे बिहार चुनाव को लेकर लोगों को प्रभावित करेंगे। अब देखना होगा कि इस बार किसकी सरकार बनेगी।

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ये चेहरे कितना डालेंगे असर
नरेन्द्र मोदी : पीएम नरेंद्र मोदी एनडीए के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। पीएम मोदी के चेहरे पर ही अभी तक एनडीए ने कई चुनाव जीता है। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में भी पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा जायेगा। बिहार में चुनाव से पहले नीतीश कुमार के लिए उनकी शानदार प्रशंसा राज्य के चुनाव में उनके महत्व को दर्शाती है।

नीतीश कुमार: नीतीश कुमार सातवें कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में हैं और सबसे ज्यादा उनके ऊपर फोकस रहेगा। हालांकि, उनकी पार्टी राज्य में सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत नहीं जुटा पाई, उसके बावजूद वह ऐसे निर्विवाद नेता रहे जिन्होंने अपने सहयोगियों के साथ संतुलन बनाकर रखा।

तेजस्वी यादव: लालू यादव जैसे व्यापक जनाधार वाले नेता की छत्र-छाया से बाहर निकलकर आना किसी बेटे के लिए आसान नहीं है। तेजस्वी यादव भी उसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और आरजेडी के 15 वर्षों के शासन की छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

चिराग पासवान: वह युवा और महत्वाकांक्षी नेता हैं। चिराग पासवान लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष हैं, जिनके पिता ने साल 2000 में पार्टी बनाई थी, लेकिन वह मेहनत के पीढ़ीगत बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने चचेरे प्रिंस राज जो समस्तीपुर से पहली बार सांसद बने हैं, उन्हें बिहार पार्टी का अध्यक्ष बनाया है।

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सुशील कुमार मोदी: 2005 से ही एनडीए की सरकार में नीतीश कुमार उप-मुख्यमंत्री रहे हैं और वह नीतीश कुमार के साथ अपने करीबी संबंधों के चलते बीजेपी और जेडीयू के बीच पुल का काम किया है। राज्य में वह बीजेपी का चेहरा है हालांकि इस दौरान पार्टी ने करीब आधा दर्जन प्रदेश अध्यक्ष बदले हैं। इससे पार्टी के अंदर उनके कद को जाहिर करता है।

असदुद्दीन ओवैसी: असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मस्लिमीन (एआईएमआईएम) बिहार की राजनीति में कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं है, लेकिन उनकी बढ़ती महत्वाकांक्षा विरोधियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। बिहार में ऐसी 80 सीटें हैं जहां पर अल्पसंख्यकों का दबदबा है। सीमांचर की 30 विधानसभा सीटों पर अल्पसंख्यकों वोटों का विभाजन निर्णायक हो सकता है।

 

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