गोली काण्ड, एक सप्ताह बाद पटरी पर लौट रही ग्रामीणों की जिन्दगी

बिजनौर। पेदा की घटना को पूरा एक सप्ताह पूरा हो चुका है। अब गांव वासियों की जिन्दगी पटरी पर लौटने लगी है। संघर्ष के बाद दोनों सम्प्रदाय के बीच पैदा हुई खाई के पटने में कुछ वक्त जरूर लगेगा। फिलहाल गांव में भारी पुलिस व पीएसी बल तैनात है।




कोतवाली शहर क्षेत्र के ग्राम पेदा में पिछले शुक्रवार को दो पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ था। जब गोलियां की तड़तड़ाहट थमी, तब तक तीन लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे थे, जबकि कई घायल हो चुके थे। मामला अलग-अलग संप्रदाय का होने के कारण प्रशासन से लेकर शासन तक ने तत्परता दिखाते हुए न सिर्फ स्थित को काबू में कर इस आग को पेदा से बाहर फैलने से रोका, बल्कि मृतक व घायल पक्ष पर भारी-भरकम मुआवजे का मरहम लगाया। सुरक्षा की दृष्टि से गांव में भारी पुलिस व पीएसी बल तैनात कर दिया गया था।





जिले के अलावा गैर जनपदों के नेता व कथित समाजसेवी अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए पेदा पहुंचने लगे, जिन्हे प्रशासन ने सैंट मेरीज चैराहा तक पार नहीं करने दिया। एक को बीते पूरे एक सप्ताह का समय हो चुका है। गांव के हालात सामान्य से होने लगे हैं। अब ग्रामीण पहले की तरह तड़के खेतों में जा रहे हैं, वहीं मजदूर भी सुबह को घर से निकलकर दिन ढलने के बाद आ रहे हैं। गांव के लोगों को अभी सम्प्रदाय की दूरी मिटाने में जरूर समय लगेगा। उस संघर्ष में जो खाई दो समुदाय के बीच पैदा हो गई थी, उसे पाटने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं।

शायद इस मामले को राजनीति से दूर रखकर जिला प्रशासन अपना फर्ज निभाता, तो अब तक स्थिति में काफी सुधार हो चुका होता। फिलहाल पेदा के लोग अपनी पहले जैसी जिन्दगी जीने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस मामले को लेकर शरारती तत्वों की हरकते व समय-समय पर फैलने वाली अफवाहे ग्रामीणों को परेशान किए हुए है। ग्रामीणों की सुरक्षा के मद्देनजर गांव में भारी पुलिस व पीएसी बल तैनात है।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट