कहीं बवाल न करा दे सदर बाजार का अतिक्रमण, अधिकारी अंजान

बिजनौर। सदर बाजार में होने वाला अतिक्रमण किसी दिन बवाल न करा दे। जबरन दुकानों के आगे ठेले लगाने व गंदगी फैलाने को लेकर बाजार में आए-दिन कहासुनी होती रहती है। कभी-कभी ये कहासुनी बड़ा रूप भी ले लेती हैं। वैसे तो पूरा शहर ही अतिक्रमण की जद में है। शायद ही शहर का कोई सा ऐसा व्यवसायिक स्थल होगा, जहां अतिक्रमण न हो। कुछ स्थानों पर दुकानदार दिन अथवा महिने के हिसाब से रूपए लेकर अपनी दुकान के आगे ठेला लगवाते हैं, जबकि कुछ जगहों पर दबंगता के बल पर ठेले अथवा अन्य माध्यमों से अस्थाई अतिक्रमण किया जाता है। हालांकि जिस स्थान पर अतिक्रमण किया जाता है, वह सरकारी जमीन होती है और सरकारी नुमाइंदे अपनी जगह से अवैध कब्जा हटवाने में कोई रूचि भी लेना पसंद नहीं करते, लेकिन ठेलों व अतिक्रमण के कारण उन दुकानदारों का कुछ कारोबार जरूर प्रभावित होता है, जिनके बाहर ये लगाए जाते हैं।




आर्थिक स्वार्थ के कारण कुछ दुकानदार चुपचाप रहते हैं, लेकिन जिनका कारोबार इस अतिक्रमण के कारण अथिक प्रभावित होता है, वे रूपयों का लालच न करके अक्सर इन अतिक्रमणकारियों का विरोध करते हैं। सदर बाजार के मौजूद किराना के अधिकांश थोक विक्रेता समेत कई व्यापारी भी इसी श्रेणी में से हैं। इस बाजार से लोगों का आवागमन अधिक होने के कारण अधिकांश जाम लगा रहता है। वाहन निकलना दूर की बात, लोग पैदल भी नहीं गुजर पाते हैं। ऐसे में अगर दुकानों के आगे ठेले खड़े हो अथवा गंदगी हो, इनका व्यापार प्रभावित होना लाजिमी है। यही कारण है कि सुबह को दुकान खुलने के बाद ये व्यापारी अपनी दुकानों के आगे ठेला लगा हुआ नहीं देखना चाहते। उधर सदर बाजार के पास स्थित सब्जी मंडी में गैर सम्प्रदाय के लोगों का सब्जी व फलों का बड़ी संख्या में कारोबार है। मंडी में जगह कम होने के कारण अधिकांश फलों के ठेले मंडी से बाहर सदर बाजार में व्यापारियों की दुकानों के आगे खड़े रहते हैं। अक्सर दुकानदारों व ठेले वालों में कहासुनी होती रहती है। अधिकांश ठेले वाले व दुकानदार अलग-अलग सम्प्रदाय के होते हैं। पहले तो शायद ये मामूली झड़पे केवल तू-तू, मैं-मैं में ही सिमटकर रह जाती थी, लेकिन अब शायद ऐसा नहीं रह गया है।

पेदा कांड के बाद सक्रिय हुए शरारती तत्व किसी भी छोटे से छोटे मामले को कितना बड़ा कर दे, कहना मुश्किल है। शायद राघव अग्रवाल के साथ हुई मारपीट भी शायद इन शरारती तत्वों का प्रयास था। ठेला हटाने को लेकर हुई कहासुनी के मामूली को लेकर बड़ी संख्या में दुकान पर पहुंचकर व्यापारी के साथ मारपीट करना इन शरारती तत्वों की सक्रियता दिखाता है। पूर्व डीएम जेके आनन्द ने अतिक्रमण पर डंडा चलाकर शहर में होने वाली इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने का प्रयास किया था, लेकिन उनका तबादला होते ही स्थिति पहले की तरह हो गई। अभी भी अगर जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तो सदर बाजार का विवाद क्या रंग ले ले, यह कहना मुश्किल है।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट