सच्चा विजयी धर्म की रक्षा करने वाला ही होता है: प्रवीण शास्त्री





बिजनौर। स्थानीय रामलीला मैदान में दिन की लीला के मंचन का निर्देशन करते हुए कथा व्यास प्रवीण शास्त्री ने रामचरित मानस की चौपाईयों की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि ज्ञान, भक्ति, कर्म और व्यवहारिक आचरण संसार में व्यवस्थित जीवन जीने के लिये आवश्यक है। धीरज, धर्म, मित्र और नारी इनकी परख आपत्ति के समय ही होती है। संकट के समय यदि हमारा धैर्य खो जाये तब समझना चाहिए कि आपका धैर्य परिपक्व और गंभीरता से युक्त नहीं था।

आपत्ति के समय यदि मित्र थोड़ा सा भी सहयोग न करे तो वह मित्र नहीं कहा जा सकता। उसका साथ छोड़ देने में ही हित है, क्योंकि ऐसा स्वार्थी मित्र कभी भी धोखा दे सकता है। इसी प्रकार नारी अर्थात पत्नी भी हर परिस्थिति में पति और उसके परिवार का साथ नहीं देती तो वह वास्तव में श्रेष्ठ पत्नी नहीं हो सकती। यही उसके अच्छे बुरे की पहचान हो जाती है। सीता ने कठिन संकट की परिस्थितियों में श्रीराम जी का सहयोग किया।

भले ही उन्हें चाहे जितनी कठिनाइयों का सामना क्यों न करना पड़ा हो। दिन की लीला के समय रामलीला कमेटी के पदाधिकारीगण संजय गुप्ता, शरद गहलौत, रामदर्शन अग्रवाल, विनय अग्रवाल, डा. मनोज अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट