स्वास्थ्य पोषण दिवसों में बाल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करें: डीएम

बिजनौर। जिलाधिकारी जगतराज ने मुख्य चिकित्साधिकारी को कड़े निर्देश दिये कि मातृत्व सप्ताह के तहत जिले की एक भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य चैकअप एव टीकाकरण से वंचित न रहने पाए। उन्होनंे निर्देश दिये कि सबसे पहले गर्भवती महिलाआंे के चिन्हिकरण कर उनका पंजीकरण किया जाना आवाश्यक है और चिन्हिकरण के साथ हीं उन्हें स्वास्थ्य केन्द्रों पर लाकर उन का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवयकता के अनुसार उनका टीकाकरण एवं उपचार किया जाना सुनिश्चित किया जाए ताकि प्रसव से पहले और बाद में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामाना न करना पड़े।



जिलाधिकारी जगतराज आज पूर्वाहन में कलक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से संचालित होने वाले मातृत्व सप्ताह 14 अक्तूबर से 21 अक्तूबर, 16 तक के सफल क्रियान्वयन के लिए आयोजित बैठक में स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होनंे बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 में प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रदेश में अभियान का संचालन किया जा रहा है, जिसके अतंर्गत प्रत्येक माह की 9 तारीख को ब्लाॅक एवं जिला स्तरीय अस्पतालों मंे गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ सुविधायें उपलब्ध करायी जायेगीं। उन्होनंे बताया कि मातृत्व सप्ताह के दौरा चिन्हित जोखित वाली गर्भवती महिलाओं को प्रत्येक माह की 09 तारीख को ब्लाॅक एवं जिला स्तर पर फाॅलोअप के लिए संन्दर्भित किये जाने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होनंे इस अभियान का उद्ेदश्य बताते हुए कहा कि शत प्रतिशत महिलाओं का पंजीकरण कराना, सभी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण की जांच करना और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाऐं उपलब्ध कराना, जटिलता से ग्रस्त गर्भवतियों की पहचान और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराना, सस्ंथागत प्रसव में वृद्वि तथा ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवसों में मातृ एंव बाल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना शामिल है।

जिलाधिकारी जगतराज ने स्पष्ट निर्देश दिये कि मातृत्व सप्ताह के प्रत्येक दिन प्रातः 9 बजे से शाम 4 बजे तक ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस के स्थल पर सभी गर्भवती महिलाअेां का सही चिन्हिकरण करते हुए उनकी जांच किया जाना सुनिश्चित की जाए और यदि किसी परिहार्य कारणवश कोई महिला छूट जाए तो उसे आच्छादित करने के लिए स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर एक अतिरिक्त दिवस का आयोजन करें। उन्होनंे यह भी निर्देश दिये कि प्रत्येक दिवस पर हाई रिस्क प्रेग्नेन्सी वाली महिलाअेां की पहचान कर उन्हें ब्लाॅक चिकित्सा इकाइयों या जिला महिला/संयुक्त चिकित्सालायेां पर संचालित हाई रिस्क पे्रग्नेन्सी क्लीनिक पर जांच व उपचार के लिए लाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि हाई रिस्क पे्रग्नेन्सी वाली महिलाओं की पहचान और उनके फाॅलोअप एवं सुरक्षित प्रसव कराने के लिए ए0एन0एम0 और आशाओं को प्रोत्साहन धनराशि उपलब्ध करायी जाएगी।

उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिये कि मातृत्व सप्ताह को सफलता पूर्वक संचालित करने के लिए कार्य की प्रगति की प्रति दिन नियमित रूप से समीक्षा करें और जिस स्तर से भी लापरवाही या शिथिलता का होना प्रकाश आए उसके खिलाफ़ तत्काल कार्यवाही अमल में लायें तथा मातृत्व सप्ताह में अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियेां एवं कर्मचारियेां को प्रोत्साहित भी किया जाए। उन्होनंे जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिये कि इस महत्वपूर्ण कार्य में अंागनबाड़ी कार्यकत्रियों को निर्देशित करें कि पूर्ण निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ स्वास्थ्य कार्मिकों के साथ सहयोग करें और अपने केन्द्रों पर दर्ज गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण की जांच गंभीरतापूर्वक नियमित रूप से करती रहें, ताकि कोई भी गर्भवती महिला हाई रिस्क पे्रग्नेनसी की श्रेणी में न आने पाए। बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 सुखवीर सिंह, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 राजकुमार, जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण के अलावा अन्य विभागों के अधिकारी मोजूद थे।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट