डीएम ने बाल सुरक्षा स्वस्थ्य में कम प्रगति पाये जाने पर रोष जताया

बिजनौर। जिला अधिकारी जगतराज ने मदर व चाईल्ड ट्रेकिंग सिस्टेम 65 प्रतिशत प्रगति तथा राष्ट्रीय बाल सुरक्षा स्वस्थ्य कार्यक्रम में 40 प्रतिशत से कम प्रगति पाये जाने पर रोष व्यक्त करते हुए आगामी बैठक तक आशा का शत प्रतिशत भुगतान एवं जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थी महिला को 90 प्रतिशत भुगतान करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रभारी चिकित्साधिकारी चन्दक तथा डाटा आॅपरेटर को नोटिस जारी करने के निर्देश दिये। उन्हेांने सीएमओ को निद्रेश दिये कि जिस डाटा फीडिंग आॅपरेटर की परफार्मेंस ठीक नहीं पाई जाए, नोटिस जारी कर उनकी सेवा समाप्त करने की कार्यवाही करें।



जिलाधिकारी जगतराज ने कहा कि प्रदेश सरकार नागरिकों को अच्छी और गुणवत्तापरक निःशुल्क स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराने के प्रति अति संवेदनशील और गंभीर है और प्रयासरत है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ हर वर्ग को प्राप्त हो। उन्होनंे कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र किरतपुर में विगत दिनों उनके द्वारा किये गए निरीक्षण के दौरान एम्बुलेंस चालकों द्वारा मरीजों से रूपये लिये जाने का मामला प्रकाश में आया था। उन्हेांने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिये कि इस शिकायत की पुनवृत्ति होने पर संबंधित एम्बुलेंस के चालक और नोडल अधिकारी एम्बुलेंस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने सभी प्रा0 एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रभारी चिकित्साधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति न करने, स्वास्थ्य कार्यक्रमों को पूरी गम्भीरता और गुणवत्ता के साथ संचालित ने करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लायी जाएगी। समीक्षा के दौरान उन्होनंे पाया कि जननी सुरक्षा योजा कार्यक्रम में वार्षिक लक्ष्य 25932के सापेक्ष मात्र 12006 की प्रगति हुयी है जो कि लक्ष्य का 46.29 प्रतिशत है।




पुरूष नसबंदी के 1829 लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 14 अर्थात 0.77 प्रतिशत तथा महिला नसबंदी में 3.51 प्रतिशत, कापर टी 32.92, ओपी यूजर्स 22.91 तथा सीसी यूजर्स में 20.61 प्रतिशत की प्रगति पाये जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति बढ़ाने के निर्देश दिये। समीक्षा में मदर एवं चाइल्ड ट्रेकिंग कार्यक्रमह, डेटा एन्ट्री, गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण आदि में भी प्रगति मानक से कम पायी गयी जबकि पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण तथा राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग कार्यक्रमों में प्रगति संतोषजनक पायी गयी। उन्होनें कहा कि शासन द्वारा प्रसव के लिए हर सम्भव सुविधायें जिनमें एम्बुलेंस, डिलीवरी, उपचार आदि सेवायें मुफ़त उपलब्ध हैं और साथ ही प्रसव कराने वाली महिला को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है, इन सब के बावजूद सरकारी अस्पतालों में प्रसव कम होना गम्भीर प्रकरण है।

उन्होंने सभी एमओआईसी को चेतावनी देते हुए कहा कि अपने कार्य में अपेक्षित सुधार लायें अन्यथा जिस प्राथमिक अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मानक से कम प्रसव होना पाए जाने पर संबंधित के विरूद्व कार्यवाही की जाएगी। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी डा0 इन्द्रमणि त्रिपाठी, मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 सुखवीर सिंह, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 राजकुमार डा0 प्रमोद कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण के अलावा सभी उप मुख्य चिकित्साधिकारी तथा एमओआईसी मौजूद थे।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट

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