बैंकों के हालात नोट बदलने के लिए चार दिन बाद भी सामान्य नहीं

बिजनौर। एक हजार व पांच सौ के नोट बंद होने के चार दिन बाद भी बैंकों व डाकघरों की स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। नोट जमा करने व बदलने के लिए बैंकों व डाकघरों में मारामारी मची हुई है। लोग अपने जरूरी काम छोड़कर सुबह से ही बैंकों व डाकघरों में लाइन लगाकर खड़े हो रहे हैं।

देश में छिपा कालाधन बाहर लाने व नकली नोटों पर लगाम कसने के लिए आठ नवंबर को देश के प्रधानमंत्री ने एक हजार व पांच सौ के नोट की वैधता समाप्त करने की घोषणा कर दी थी। उसी रात 12 बजे से इन दोनों नोटों का वजूद खत्म हो गया। घोषणा होने के बाद से ही लोगों की नींदे उड़ी हुई हैं। रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद सभी बैंक व डाकघर खोले गए। बैंक व डाकघर खुलते ही इन नोटों को बदलने व जमा करने के लिए ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।



बैंक व डाकघर खुलने से पहले ही लोगों की लाइन लगनी शुरू हो गयी। डाकघर के अलावा पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इलाहाबाद बैंक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, कैनरा बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूनियन, बैंक ऑफ बड़ौदा, द अरबन कोआपरेटिव बैंक आदि की सभी शाखाओं में लोगों के बीच आपाधापी मची रही। करेंसी चेंज करने से पहले भरे जाने वाले फार्मो व आईडी का एसबीआई आदि बैंकों में बेरीफिकेशन करने के लिए अलग से काउंटर बनाया गया है। खाताधारक पहले इन काउंटर पर बेरीफिकेशन करा रहे हैं, उसके बाद उन्हे बैंक में अन्य काम के लिए एंट्री दी जा रही है।

लाइन में लगे सभी लोगों को उम्मीद थी कि उनके नोट बदले जाएंगे, लेकिन प्रतिदिन 10 हजार रूपए तक अपने खाते से निकालने का आदेश होने के बावजूद अधिकांश दो हजार रूपए ही दिए जा रहे हैं। इन लोगों को नए नोट तो नसीब नहीं हो रहे, लेकिन 100, 50, 10 रूपए के नोट के अलावा 10 रूपए के सिक्के देकर व्यवस्था बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि बैंकों के अधिकारी व कर्मचारी अपनी शाखा के खाताधारकों से भेदपूर्ण रवैया अपना रहे हैं।



ये अधिकारी व कर्मचारी अपने परीचितों को नोट बदलने व जमा करने में जरा भी देर नहीं लगा रहे, जबकि आम खाताधारकों को परेशान किया जा रहा है व बैंक से टरकाया जा रहा है। उधर शहर के जो एटीएम चालू हो गए हैं, उनकी स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। बैंकों की तरह इन एटीएम पर भी लोगों की भारी भीड़ है। लोग घंटों लाइन में लगकर रूपए निकाल रहे हैं ताकि उनके रोजमर्रा के खर्च तो कम से कम चल सके।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट