बसपा से भाजपा में पहुंचे विधायक का पार्टी में विरोध शुरू

बिजनौर/नहटौर। गुटबंदी कराने में माहिर क्षेत्रीय विधायक ओमकुमार ने बसपा मे रहते जो चाल चली वह भाजपा में भी उसी तर्ज पर गुटबंदी कराते नजर आ रहे हैं। उनके भाजपा में आते ही भाजपा की टीम दो गुटों मे बंट गई है। वही पार्टी का वोट भी भाजपा से खिसकता नजर आ रहा है। जिसके चलते ओमकुमार से नाराज भाजपा के वोटर भाजपा हाईकमान से मिलकर विधायक ओमकुमार के पार्टी से निष्कासन की मांग करने की बात कह रहे हैं।



विदित हो कि फूट डालने में माहिर ओमकुमार जब बसपा में थे तो उन्होंने बसपा पदाधिकारियों को दो भागों मे बांट दिया था और बसपा विधानसभा अध्यक्ष नरेश फौजी व अन्य कई पदाधिकारियों का पार्टी से निष्कासन तक करा दिया था। जिससे गुस्साए कई बसपा पदाधिकारी विधायक ओमकुमार से इस कदर खफा हो गए थे कि उन्होंने उनके कार्यालय पर भी जाना बन्द कर दिया था। लेकिन बसपाइयों ने उस समय जश्न मनाया था जब वह भाजपा में शामिल हो गए थे आज सभी बसपाई बसपा में हैं सब एकजुट होकर बसपा के समर्थन में खड़े हैं। झूठ बोलकर अपना उल्लू सीधा करने में माहिर विधायक ओमकुमार के झूठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है बीते कुछ माह पूर्व मौहल्ला जौशियान में अपने एक सम्मान समारोह में उन्होंने सैकड़ों लोगों के बीच आजीवन बसपा मे रहने की कसम खाई थी।



लेकिन उनकी कार्यशैली से नाराज बसपा नेताओं ने जब उनका विरोध करना शुरू कर दिया तो उनके विरोध से बौखलाए ओमकुमार को बसपा में अपनी नैया डूबती नजर आई! तब उन्होंने अपनी कसम को तोडने में पलभर की भी देर नही लगाई और लखनऊ पहुंचकर बसपा को अलविदा कहते हुए भाजपा का भगवा ध्वज थाम लिया! एक पुरानी कहावत विधायक ओमकुमार पर सटीक बैठती है कि सबकुछ बदल जाये लेकिन इंसान अपनी फितरत नहीं बदलता। ओमकुमार ने भाजपा में आने के बाद अपनी फितरत के अनुसार चलते हुए अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया और नगर में भाजपा के दो गुट खड़े कर दिए। जिसकी पहली झलक जैन समाज की गजरथ यात्रा में देखने को मिली थी। जिसके बाद ओमकुमार से नाराज कुछ भाजपाईयों ने अपनी फ्लेक्सी तक उतरवा ली थी। कुछ चाटुकारों से घिरे विधायक ओमकुमार को चाटुकारों ने उनकी आँखों पर जीत का चश्मा लगा रखा है जबकि सच्चाई इसके विपरीत दिखाई दे रही है! क्योंकि अधिकांश भाजपा वोटर किसी भी कीमत पर ओमकुमार को नहीं पचा पा रहे हैं। जिसका उदाहरण भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले मौहल्ला जोशियान में देखने को मिल जायेगा।

विधायक ओमकुमार की कार्य शैली के चलते ही भाजपा का वोट बैंक माना जाने वाला वोटर आज भाजपा से खिसकता नजर आ रहा है। नगर ही नहीं कई गांवों के काफी लोग ओमकुमार का विरोध करते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि वह शीघ्र ही भाजपा हाईकमान से मिलकर विधायक ओमकुमार के भाजपा से निष्कासन की मांग करेगें। और यदि पार्टी ने उनकी नही सुनी तो वह ओमकुमार के अलावा किसी अन्य को वोट देने को विवश होंगे। ओमकुमार विरोधियों का कहना है कि वह 16 तारीख को भाजपा की परिवर्तन रैली के दौरान भी पार्टी नेताओं से ओमकुमार का विरोध दर्ज कराएगें। दिलचस्प बात यह है कि विधायक ओमकुमार दलित वोटों को भी अपना बता रहे हैं लेकिन शायद वह भूल गए हैं कि बसपा में रहते भी उनका विरोध दलित ही कर रहे थे। और कुछ दिन पूर्व तक दलितों को बहन जी (बसपा) का वोट बैंक बताने वाले ओमकुमार दलित वोट को अपना बताकर नासमझी कर रहे हैं।



आज आलम यह है है कि दलित तो क्या भाजपा का वोट बैंक भी ओमकुमार की वजह से भाजपा से छिटकता जा रहा है। यदि समय रहते भाजपा हाईकमान ने कोई शख्त कदम नहीं उठाया तो नहटौर विधानसभा को जीतना भाजपा का सपना मात्र रह जायेगा और कोई सपा या बसपा का विधायक बनकर विधानसभा में नहटौर का प्रतिनिधत्व करता दिखाई देगा और विधायक ओमकुमार सिर्फ उन लोगों तक सिमट कर रह जायेगें जिन्होंने उनकी आँखों पर जीत का चश्मा लगाकर भाजपा का परम्परागत वोट भी उनसे दूर कर दिया है।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट