जाम के झाम से निजात कैसे मिले, स्कूल के समय और भी गंभीर हो जाती समस्या

बिजनौर। पूरा शहर जाम के झाम के फंसा हुआ है और लोग परेशान हैं। स्कूल खुलने व बंद होने के समस्या यह जाम और भी विकराल रूप ले लेता है। कई चौराहे ऐसे हैं जिन पर दिनभर ये हालात रहते हैं कि पैदल तक निकलना दूभर हो जाता है, लेकिन अधिकारी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।




जिला मुख्यालय कहने को तो अधिकारियों का गढ़ है। हर विभाग का अधिकारी शहर में मौजूद मिलेंगे और सड़कों पर भी घूमते दिखेंगे। इसके बावजूद जाम की समस्या से शहर भी अछूता नहीं रहा है। शहर के शंभू दयाल का चौराहा, नगर पालिका चौराहा, डाकघर चौराहा, बुल्ला का चौराहा, सदर बाजार, घंटा घर मार्ग व जानी का चौराहा आदि मार्गो पर पूरे दिन जाम लगा रहा है। आलम यह रहता है कि वाहनों से निकलना दूर की बात, पैदल गुजरना तक एक चुनौती होता है। सुबह को स्कूल खुलने के समय व दोपहर को बंद होते समय यह जाम की परेशानी और भी विकट हो जाती है। इस समय पर इन चौराहों के जैसा हाल शहर के लगभग हर उस मार्ग का हो जाता है, जहां से स्कूली बच्चे आते अथवा जाते हैं।




जाम लगने का सबसे बड़ा कारण स्थाई व अस्थाई अतिक्रमण को माना जाता है। दरअसल व्यापारियों व ठेला लगाने वालों ने शहर के लगभग सभी चौराहों व मुख्य मार्गो पर अतिकंमण कर रखा है। अतिकंमण के कारण ये मार्ग संकरे हो गए और इन पर जाम लगने लगा। इसके अलावा शहर में नियमों को ताक पर रखकर घूमने वाली ई-रिक्शाएं भी जाम लगने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह दुर्भाग्य की बात है कि शहर की यह हालत यहां तैनात अधिकारियों को दिखाई नहीं देते अथवा यह कहें कि अधिकारी देखना नहीं चाहते।

Bijnor News 441 :

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट

बिजनौर। पूरा शहर जाम के झाम के फंसा हुआ है और लोग परेशान हैं। स्कूल खुलने व बंद होने के समस्या यह जाम और भी विकराल रूप ले लेता है। कई चौराहे ऐसे हैं जिन पर दिनभर ये हालात रहते हैं कि पैदल तक निकलना दूभर हो जाता है, लेकिन अधिकारी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं। जिला मुख्यालय कहने को तो अधिकारियों का गढ़ है। हर विभाग का अधिकारी शहर में मौजूद मिलेंगे और सड़कों पर भी घूमते दिखेंगे। इसके बावजूद जाम की समस्या से शहर भी अछूता नहीं रहा है। शहर के शंभू दयाल का चौराहा, नगर पालिका चौराहा, डाकघर चौराहा, बुल्ला का चौराहा, सदर बाजार, घंटा घर मार्ग व जानी का चौराहा आदि मार्गो पर पूरे दिन जाम लगा रहा है। आलम यह रहता है कि वाहनों से निकलना दूर की बात, पैदल गुजरना तक एक चुनौती होता है। सुबह को स्कूल खुलने के समय व दोपहर को बंद होते समय यह जाम की परेशानी और भी विकट हो जाती है। इस समय पर इन चौराहों के जैसा हाल शहर के लगभग हर उस मार्ग का हो जाता है, जहां से स्कूली बच्चे आते अथवा जाते हैं। जाम लगने का सबसे बड़ा कारण स्थाई व अस्थाई अतिक्रमण को माना जाता है। दरअसल व्यापारियों व ठेला लगाने वालों ने शहर के लगभग सभी चौराहों व मुख्य मार्गो पर अतिकंमण कर रखा है। अतिकंमण के कारण ये मार्ग संकरे हो गए और इन पर जाम लगने लगा। इसके अलावा शहर में नियमों को ताक पर रखकर घूमने वाली ई-रिक्शाएं भी जाम लगने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह दुर्भाग्य की बात है कि शहर की यह हालत यहां तैनात अधिकारियों को दिखाई नहीं देते अथवा यह कहें कि अधिकारी देखना नहीं चाहते।बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट