मंदिर में स्थापित हुई श्री त्रयबंकेश्वर एवं तिरूपति बाला जी की मूर्तियां

बिजनौर/धामपुर। मौहल्ला खातियान स्थित सुनारों वाले शिव मन्दिर मैढ़ सभा में मन्दिर की महिला कमेटी के सौजन्य से श्री त्रयबंकेश्वर जी एवं श्री तिरुपति बाला जी की मूर्तियों का विधिवत् स्थापना का आयोजन किया गया। स्थापना का कार्यक्रम आचार्य दिनेश चन्द्र भारद्वाज ने पूर्जा-अर्चना, विधि विधान के बीच मंत्रोचारण के साथ सम्पन्न कराया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला मण्डल समिति की प्रदेश अध्यक्षा श्री मति सुमित्रा देवी रही।




कार्यक्रम के मुख्य यजमान पी.डबलू डी. से सवेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नरेश वर्मा, उनकी पत्नी, उमा वर्मा पुत्रगण नितिन वर्मा, सरिता वर्मा, लवी वर्मा, पूजा वर्मा, दीपमाला वर्मा, उनके पुत्रगण मोहित वर्मा, बीना वर्मा, सौरभ वर्मा, नेहा वर्मा, राजीव वर्मा, विजय लक्ष्मी वर्मा, गौरव वर्मा उर्फ अन्नू व पौत्री भाव्या वर्मा रहे। मूर्तियों को पंचामृत से स्नान कराकर मंगल कलश यात्रा बैन्ड बाजे के साथ निकाली गई। कलश यात्रा मन्दिर से प्रारम्भ होकर चवन्नी वाला चैराहा, भगत सिंह चैक, फल चैक होते हुए वापिस मन्दिर में आकर सम्पन्न हुई। कलश यात्रा में भक्त जन बैन्ड की धार्मिक धुनों पर मधुर भजन गायन करते हुए चल रहे थे। भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कलश यात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा द्वारा स्वागत किया गया। कलश यात्रा का मन्दिर में वापिस आने के बाद हवन-यज्ञ का कार्यक्रम आयोजित किया गया।




जिसमें ज्ञानचन्द वर्मा, मुन्ना वर्मा, जगदीश वर्मा, सतीश वर्मा, रिन्कू, संजय वर्मा, पीयूष वर्मा, नरेश वर्मा, विजय प्रकाश वर्मा, अजय वर्मा, जितेन्द्र वर्मा, सनी वर्मा, महेन्द्र वर्मा, सुरेश रस्तौगी सहित महिलाओं ने हवन-यज्ञ में आहूतियां देकर देश, समाज व परिवार की सुख शान्ति एवं समृद्धि की प्रार्थना की। कलश यात्रा में सरिता वर्मा, पूजा वर्मा, शालिनी वर्मा, सुमन वर्मा, उमा वर्मा, दीपा वर्मा, नेहा वर्मा, माया वर्मा, सोनिया, विजय लक्ष्मी, कंचन, विनोद बाला, नीलम, नूतन, कमलेश, अनिता, बीना, ममता, मीनाक्षी, कनक, नमिता वर्मा, रेनू भारद्वाज, मधुबाला अग्रवाल, विद्यावती, संतोष सैनी, सुमित्रा देवी, रुकमणि शर्मा, कमला भटनागर, ओमवती, निर्मला, गुड्डी, मिथलेश वर्मा आदि महिलाओं ने भक्ति गीतों का गायन कर कलश यात्रा को मन मोहक बना दिया। नरेश वर्मा ने एक भेंट वार्ता में बताया कि महाराष्ट्र के नासिक में त्रयंबकेश्वर जी में ब्रह्ममा, विष्णु, महेश तीनों देवता पिण्डी के रुप में विराजमान है जो एक महत्व पूर्ण ज्योर्तिलिंग है।

उन्होंने बताया कि इसी स्थान पर तीनों देवताओं की संयुक्त मूर्ति पूजा-अर्चना पूरे महाराष्ट्र एवं देश भर में की जाती है। उन्होंने बताया कि पितृदोष एवं काल सर्प दोष का निवारण भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि काले काल सर्प दोष की पूजा करने से त्रयबंकेश्वर जी का स्थान का महत्व अधिक है। उन्होंने बताया कि पितृदोष का निवारण करने के लिए तिथि के अनुसार पूजा की जाती है।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट

Loading...