बैंको की लाइनों में लगकर ठिठुरती ठंड में पुलिस की गालियां खा रहे लोग

बिजनौर/नगीना। नोटबंदी को 36 दिन बीत चुके हैं किंतु गरीब मजदूर तथा किसान अपने ही पैसे के लिये भारी कोहरे तथा ठिठुरती ठंड में लंबी लंबी लाइनों में लगे खड़े हैं। उधर काम तथा मजदूरी छोड़ भूखे प्यासे बैंकों की लाइनों में सुबह छह बजे से आकर लग जाते हैं और उधर पुलिस की गालियां खाते हैं।





ऐसा पहली बार हुआ है कि इस देश में अपने पैसे के लिये ही बैंकों की लाइनों में मारा मारी धक्का मुक्की हो रही है तथा स्टेट बैंक के मैनेजर तथा बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर की बैंक ग्राहकों के साथ गुंडागर्दी कम होने का नाम नहीं ले रही है। स्टेट बैंक के मैनेजर मनोज अग्रवाल भी तीन दिनों से मात्र एक हजार रुपये बैंक ग्राहकों को दे रहे हैं और बैंक ग्राहकों को जिसमें गरीब मजदूर तथा छोटा किसान तथा महिलायें उनकी अभद्रता का शिकार हो रही हैं।




महिलायें इस कड़ाके की ठंड में सुबह छह बजे स्टेट बैंक की लाइनों में बैठ जाती हैं और बैंक खुलने के इंतजार में बैठे बैठे सूख जाती हैं और जिन महिलाओं का नंबर नहीं आता तो बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों को कोसती पीटती चली जाती हैं। आम जनता का कहना है कि अभी लाइनों की स्थिति सुधरने के आसार नहीं नजर आते बस गरीब का तो भगवान ही मालिक है।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट

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