चीनी मिलों में अधिक पैदावार से गन्ना खरीद के सारे रिकार्ड टूटे

बिजनौर। गन्ने की अधिक पैदावार के लिए डीसीओ की मेहनत आखिरकार रंग लाई। जिले में गन्ने की बंपर पैदावार हुई। जिले की चीनी मिले भी प्रदेश में सबसे पहले चली। पिछले 10 वर्षो में सर्वाधिक गन्ना खरीद का रिकार्ड बन चुका है, जबकि अभी मिले चल रही है और गन्ना खरीद जारी है। इस वर्ष गन्ना खरीद का आंकड़ा 9 करोड़ कुंतल छूने की उम्मीद है।




जिला बिजनौर किसान बाहुल्य क्षेत्र है। यहां पर किसानों की मुख्य फसल गन्ना है। गन्ने की पैदावार पर किसान का फायदा और नुकसान टिका होता है। वैसे तो जिले में गन्ना विभाग की कमान संभालने वाले लगभग सभी डीसीओ ने अपनी ओर से प्रयास किए कि गन्ने की पैदावार अधिक से अधिक हो सके, लेकिन उनकी इच्छा सोच के अनुरूप परवान नहीं चढ़ सकी। अन्य अधिकारियों की तरह जिला गन्ना अधिकारी के रूप में ओमप्रकाश सिंह चार्ज संभालने के बाद से ही गन्ने की पैदावार बढ़ाने के प्रयास में लग गए। उनके प्रयासों से हर वर्ष गन्ने की पैदावार बढ़ी भी।

सरकारी रिकार्ड के अनुसार जनपद की सभी चीनी मिलों में वर्ष 2012-13 मे छह करोड़ पांच लाख कुुंतल, वर्ष 2013-14 मे छह करोड़ 64 लाख कुंतल, वर्ष 2014-15 में सात करोड़ 52 लाख कुंतल व वर्ष 2015-16 मे सात करोड़ 47 लाख कुंतल गन्ना खरीद हुई। वर्तमान सत्र 2016-17 में डीसीओ ओमप्रकाश सिंह ने दिन रात इस कदर मेहनत की पिछले 10 वर्षो के आंकड़े टूट गये। इस सत्र में न सिर्फ गन्ने की सर्वाधिक पैदावार हुई, बल्कि बढ़ोत्तरी के अनुपात ने भी रिकार्ड बनाया। जिले की चीनी मिले अभी करीब 15 दिन और गन्ने की पेराई जारी रखेगी।




इसके बावजूद अब तक इन चीनी मिलों में सात करोड़ 75 लाख कुंतल गन्ना खरीदा जा चुका है। मिले बन्द होने तक यह आंकड़ा लगभग 9 करोड़ कुंतल तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस संबंध मे डीसीओ ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि गन्नेे की पैदावार बढने में किसानों का अहम योगदान रहा है। किसानों ने ट्रेंच विधि पर भरोसा कर गन्ने की फसल बाई थी, जिसका लाभ किसानों को मिला है। गन्ने की पैदावार अधिक होने के कारण जिले की सभी चीनी मिले प्रदेश की अन्य चीनी मिलों की तुलना में सबसे पहले चलवा दी गई थी। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में भी जिले का गन्ना किसान अधिक पैदावार का लाभ उठाता रहेगा।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट