बिजनौर हिंसा: पुलिस ने बिना वादी को बताए दर्ज किया फर्जी मुकदमा

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बिजनौर हिंसा: पुलिस ने 250 लोगों के विरूद्ध गंभीर धाराओं में दर्ज किया एफ़आईआर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस पर अभी तक यही आरोप लगता था कि वह अधिकारियों के कहने पर भी आसानी से रिपोर्ट दर्ज नहीं करती। लेकिन जनपद बिजनौर की हुनरबाज नगीना पुलिस ने रस्सी का सांप नही बल्कि अजगर बनाते हुए बिना वादी की सहमति के एक दो नहीं बल्कि 250 लोगों के विरूद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया। नगीना पुलिस के कारनामे ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खडे तो कर ही दिए है साथ ही विपक्ष को भी सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है।

Bijnor Violence Police Lodges Fir Against 250 People In Serious Sections :

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बीती 20 दिसम्बर को पूरे प्रदेश के साथ साथ जनपद बिजनौर के नगीना में भी जुमे की नमाज के बाद उग्र हुए प्रदर्शनकारियों ने नगीना पुलिस पर मंडी मौलगंज में पथराव कर दिया था जिसके बाद नगीना पुलिस ने भी लाठीचार्ज के बाद कार्रवाही करते हुए 79 लोगों को मौके से पकड़ा था बाद में पुलिस की ओर से 83 नामजद व 150 अज्ञात लोगों के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

बवाल के समय जोश में आई नगीना पुलिस ने पकडे गये नाबालिगों पर इस कदर जुल्म ढाया था कि ब्रिटिश शासनकाल को भी पीछे छोड़ दिया था बुरी तरह से जख्मी और घायल नाबालिगों को पुलिस ने बाद में छोड़ तो दिया था लेकिन मानवाधिकार आयोग द्वारा मीडिया की खबर का संज्ञान लेने के बाद नगीना पुलिस को अपनी खाल बचाने का डर तब सताने लगा जब शासन के आदेश पर बवाल की जांच नगीना सर्किल से हटाकर नजीबाबाद सर्किल को दे गई जिससे नगीना पुलिस की उगाही भी बंद हो गई।

मानवाधिकार आयोग के चाबुक से बचने व पहले मामले में अवैध उगाही न हो पाने से बिलबिलाई नगीना पुलिस ने एक नाबालिग का सहारा लेते हुए रस्सी का सांप नही बल्कि अजगर बनाते हुए अपना हुनर दिखाया और नाबालिग के पिता को बिना बताए आठ दिन बाद बीती 28 दिसम्बर को 250 अज्ञात लोगों के विरूद्ध बलवे का नया मुकदमा लिख लिया।

फर्जी मुकदमा दर्ज करते ही नगीना पुलिस एक बार फिर उगाही के लिये सक्रिय हो गई है नगीना थाने के कई चर्चित पुलिसकर्मी दलालो के माध्यम से उगाही करने में जुट गए है। इतना ही नही इस फर्जी मुकदमें की जांच उस दागी दरोगा जितेन्द्र कुमार को सौंपी गई जो पूर्व में भी फर्जी मुकदमें लिखने में चर्चित रहा है तथा उस दरोगा जितेन्द्र कुमार के कारनामों का मांमला आईजी मुरादाबाद रेंज के दरबार तक पहुंचा था जिसमें उस समय भी पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी।

वहीं वादी बनाये गये तौकीर अहमद को मामले का पता ही नहीं उसका कहना है कि कागजों पर दस्तखत कराकर उसके नाबालिग पुत्र को छोड़ने के नाम पर पुलिस ने क्या खेल खेला वह नही जानता है। नगीना पुलिस का यह चर्चित कारनामा उजागर होने के बाद विपक्ष ने भी भाजपा सरकार पर हमला बोल दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने हल्ला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार में पुलिस बेलगाम हो चुकी है पुलिस लोगो की सुरक्षा छोड सत्ता का दुरुपयोग कर रही है जिसका उदहारण जनपद बिजनौर की नगीना पुलिस है हमारी पार्टी किसी भी व्यक्ति का उत्पीडन बर्दाश्त नही करेगी।

रिपोर्ट- शहजाद अंसारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस पर अभी तक यही आरोप लगता था कि वह अधिकारियों के कहने पर भी आसानी से रिपोर्ट दर्ज नहीं करती। लेकिन जनपद बिजनौर की हुनरबाज नगीना पुलिस ने रस्सी का सांप नही बल्कि अजगर बनाते हुए बिना वादी की सहमति के एक दो नहीं बल्कि 250 लोगों के विरूद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया। नगीना पुलिस के कारनामे ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खडे तो कर ही दिए है साथ ही विपक्ष को भी सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बीती 20 दिसम्बर को पूरे प्रदेश के साथ साथ जनपद बिजनौर के नगीना में भी जुमे की नमाज के बाद उग्र हुए प्रदर्शनकारियों ने नगीना पुलिस पर मंडी मौलगंज में पथराव कर दिया था जिसके बाद नगीना पुलिस ने भी लाठीचार्ज के बाद कार्रवाही करते हुए 79 लोगों को मौके से पकड़ा था बाद में पुलिस की ओर से 83 नामजद व 150 अज्ञात लोगों के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बवाल के समय जोश में आई नगीना पुलिस ने पकडे गये नाबालिगों पर इस कदर जुल्म ढाया था कि ब्रिटिश शासनकाल को भी पीछे छोड़ दिया था बुरी तरह से जख्मी और घायल नाबालिगों को पुलिस ने बाद में छोड़ तो दिया था लेकिन मानवाधिकार आयोग द्वारा मीडिया की खबर का संज्ञान लेने के बाद नगीना पुलिस को अपनी खाल बचाने का डर तब सताने लगा जब शासन के आदेश पर बवाल की जांच नगीना सर्किल से हटाकर नजीबाबाद सर्किल को दे गई जिससे नगीना पुलिस की उगाही भी बंद हो गई। मानवाधिकार आयोग के चाबुक से बचने व पहले मामले में अवैध उगाही न हो पाने से बिलबिलाई नगीना पुलिस ने एक नाबालिग का सहारा लेते हुए रस्सी का सांप नही बल्कि अजगर बनाते हुए अपना हुनर दिखाया और नाबालिग के पिता को बिना बताए आठ दिन बाद बीती 28 दिसम्बर को 250 अज्ञात लोगों के विरूद्ध बलवे का नया मुकदमा लिख लिया। फर्जी मुकदमा दर्ज करते ही नगीना पुलिस एक बार फिर उगाही के लिये सक्रिय हो गई है नगीना थाने के कई चर्चित पुलिसकर्मी दलालो के माध्यम से उगाही करने में जुट गए है। इतना ही नही इस फर्जी मुकदमें की जांच उस दागी दरोगा जितेन्द्र कुमार को सौंपी गई जो पूर्व में भी फर्जी मुकदमें लिखने में चर्चित रहा है तथा उस दरोगा जितेन्द्र कुमार के कारनामों का मांमला आईजी मुरादाबाद रेंज के दरबार तक पहुंचा था जिसमें उस समय भी पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। वहीं वादी बनाये गये तौकीर अहमद को मामले का पता ही नहीं उसका कहना है कि कागजों पर दस्तखत कराकर उसके नाबालिग पुत्र को छोड़ने के नाम पर पुलिस ने क्या खेल खेला वह नही जानता है। नगीना पुलिस का यह चर्चित कारनामा उजागर होने के बाद विपक्ष ने भी भाजपा सरकार पर हमला बोल दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने हल्ला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार में पुलिस बेलगाम हो चुकी है पुलिस लोगो की सुरक्षा छोड सत्ता का दुरुपयोग कर रही है जिसका उदहारण जनपद बिजनौर की नगीना पुलिस है हमारी पार्टी किसी भी व्यक्ति का उत्पीडन बर्दाश्त नही करेगी। रिपोर्ट- शहजाद अंसारी