निरहुआ का अखिलेश पर तंज, कहा- अपनी सीट काे बचाने के चक्कर में भौजाई, भाई और भतीजे हार गए

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निरहुआ का अखिलेश पर तंज, कहा- अपनी सीट काे बचाने के चक्कर में भौजाई, भाई और भतीजे हार गए

लखनऊ। भोजपुरी सिने स्टार और आजमगढ़ से भाजपा के प्रत्याशी रहे दिनेश लाल यादव निरहुआ ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसा है। निरहुआ ने कहा कि अखिलेश यादव ने मुझे हराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी लेकिन खुद उनका परिवार ही चुनाव हार गया। बता दें कि अखिलेश ने निरहुआ को करीब ढाई लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव हराया था।

Bjp Dinesh Lal Yadav Nirhua Reaction On Defeat With Sp Akhilesh Yadav Said He Lose 3 Family Seats :

आजमगढ़ से अखिलेश यादव के सामने चुनाव लड़ने वाले बीजेपी के निरहुआ ने कहा कि उन्होंने मुझे हराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यहां तक की बदांयू से सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र, फिरोजाबाद से अक्षय आदि ने भी आजमगढ़ में प्रचार में किया।

लेकिन वो दोनों खुद अपनी सीट हार गए। यहां तक डिंपल यादव (अखिलेश की पत्नी) भी चुनाव हार गईं। निरहुआ ने आगे कहा कि अखिलेश अपनी सीट बचाने के चक्कर में परिवार की सीट हार गए। इसी को निरहुआ ने अपनी जीत बताया है।

अखिलेश से भी ज्यादा सक्रिय रहेंगे

निरहुआ ने दावा किया आने वाले पांच सालों में उनकी सक्रियता आजमगढ़ में लगातार बनी रहेगी। सक्रियता इतनी बनी रहेगी कि जीत कर भी अखिलेश यादव की सक्रियता नहीं रहेगी।

लखनऊ। भोजपुरी सिने स्टार और आजमगढ़ से भाजपा के प्रत्याशी रहे दिनेश लाल यादव निरहुआ ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसा है। निरहुआ ने कहा कि अखिलेश यादव ने मुझे हराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी लेकिन खुद उनका परिवार ही चुनाव हार गया। बता दें कि अखिलेश ने निरहुआ को करीब ढाई लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव हराया था। आजमगढ़ से अखिलेश यादव के सामने चुनाव लड़ने वाले बीजेपी के निरहुआ ने कहा कि उन्होंने मुझे हराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यहां तक की बदांयू से सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र, फिरोजाबाद से अक्षय आदि ने भी आजमगढ़ में प्रचार में किया। लेकिन वो दोनों खुद अपनी सीट हार गए। यहां तक डिंपल यादव (अखिलेश की पत्नी) भी चुनाव हार गईं। निरहुआ ने आगे कहा कि अखिलेश अपनी सीट बचाने के चक्कर में परिवार की सीट हार गए। इसी को निरहुआ ने अपनी जीत बताया है। अखिलेश से भी ज्यादा सक्रिय रहेंगे निरहुआ ने दावा किया आने वाले पांच सालों में उनकी सक्रियता आजमगढ़ में लगातार बनी रहेगी। सक्रियता इतनी बनी रहेगी कि जीत कर भी अखिलेश यादव की सक्रियता नहीं रहेगी।