BJP नेता की औकात याद दिलाने वाली महिला अफसर श्रेष्ठा सिंह का हुआ तबादला

Bjp Leader Reminiscent Of Senior Leader Suresh Singh

लखनऊ। यूपी में जिस प्रशासनिक अधिकारी ने नेताओं को उनकी औकात याद दिलाने का साहस दिखाया उसे इनाम के रूप में ट्रांसफर नसीब हुआ है या तो निलंबन। यह तो यूपी का इतिहास रहा है कि जब भी किसी प्रशासनिक अधिकारी ने किसी सत्ताधारी को सबक सिखाना चाहा है उसे मुंह की खानी पड़ी है। सरकार चाहे जो भी हो नियम यही रहा है। अब एक फिर ऐसा ही कुछ योगी सरकार में देखने को मिला है। दरअसल, पिछले महीने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर बीजेपी नेता का चालान करने वाली महिला पुलिस अधिकारी का तबादला कर दिया गया है। बुलंदशहर के स्याना में सीओ के पद पर तैनात श्रेष्ठा सिंह को बहराइच भेज दिया गया है। बताते चले कि ट्रैफिक नियम तोड़ने पर बीजेपी नेता ने पहले अपनी सत्ता की हनक दिखा श्रेष्ठा की बोलती बंद करना चाहा था जिस पर पलटवार करते हुए इस महिला अधिकारी ने इस बीजेपी नेता की बीच बजार छीछालेदार कर दी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने इस महिला अफसर के कार्यशैली को जमकर सराहा साथ ही इसे लेडी सिंघम तक की उपाधि दे डाली।

23 जून को बुलंदशहर स्याना में चेकिंग के दौरान जिला पंचायत सदस्या प्रवेश देवी के पति प्रमोद लोधी को पुलिस ने बिना हेलमेट व बिना कागजात के बाइक चलाते पकड़ा और चालान किया तो वह सीओ स्याना श्रेष्ठा सिंह से ही भिड़ गए। भाजपा नेता की धमकी के बाद भी उनपर कानून का डंडा चलाने वाली महिला पुलिस ऑफिसर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद से लोगों ने उनको ‘लेडी सिंघम’ की उपाधि दी थी। वायरल वीडियो में श्रेष्ठा सिंह बीजेपी नेता को बताती दिखीं थीं कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। नियम-कानून तोडऩे पर वह सबके खिलाफ एक समान एक्शन लेंगी।प्रमोद लोधी ने सीओ से भी अभद्रता की, जिसके बाद उनके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में एफआईआर दर्ज कराकर गिरफ्तार कर लिया गया।

जब प्रमोद को कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाया गया तो वहां बड़ी संख्या में भाजपा नेता के समर्थक पहुंच गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे चालान के नाम पर दो हजार रुपये मांगे। हंगामा कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को श्रेष्ठा सिंह ने कहा कि आप लोग ऊपर चले जाइये और सीएम साहब से लिखवाकर ले आइये की पुलिस को चेकिंग का कोई अधिकार नहीं है।वो गाडिय़ों की चेकिंग न करे। हम अपनी गाडिय़ों की जांच नहीं करवाएंगे। उन्होंने कहा था कि अगर कोई नियमों का उल्लंघन करेगा, सरकारी कामकाज में बाधा डालेगा और बदसलूकी करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

लखनऊ। यूपी में जिस प्रशासनिक अधिकारी ने नेताओं को उनकी औकात याद दिलाने का साहस दिखाया उसे इनाम के रूप में ट्रांसफर नसीब हुआ है या तो निलंबन। यह तो यूपी का इतिहास रहा है कि जब भी किसी प्रशासनिक अधिकारी ने किसी सत्ताधारी को सबक सिखाना चाहा है उसे मुंह की खानी पड़ी है। सरकार चाहे जो भी हो नियम यही रहा है। अब एक फिर ऐसा ही कुछ योगी सरकार में देखने को मिला है। दरअसल, पिछले महीने…