‘बल्लामार’ भाजपा विधायक को मिली जमानत, निगम अफसर को पीटने का है आरोप

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'बल्लामार' भाजपा विधायक को मिली जमानत, निगम अफसर को पीटने का है आरोप

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के विधायक और वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय द्वारा निगमकर्मी से मारपीट मामले में जमानत मिल गयी है। इंदौर कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने भोपाल की विशेष अदालत में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी। आकाश विजयवर्गीय को 20-20 हज़ार रुपये के बांड पर बेल मिली है। शुक्रवार को कोर्ट ने इंदौर से केस से जुड़े दस्तावेज मंगवाने के आदेश देते हुए सुनवाई के लिए शनिवार का दिन तय किया था।

Bjp Mla Akash Vijayvargiya Case Special Court Bhopal Bail Hearing :

भाजपा विधायक के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि जिस महिला का मकान तोड़ा जा रहा था वह घटना वाले दिन ढाई बजे निगम अफसरों के खिलाफ बदसलूकी करने की रिपोर्ट लिखवाने गई थी। इसके बावजूद उसकी पुलिस ने सुनवाई नहीं की, जिसके बाद विधायक वहां पहुंचे। पुलिस ने जनप्रतिनिधि की बात सुनने के बजाए उनके खिलाफ ही केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। जबकि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ऐसे मामलों में जांच होनी चाहिए। उनका पक्ष भी सुना जाना चाहिए।

ये है पूरा मामला

ज्ञात हो कि नगर निगम अधिकारी को बल्ले से पीटने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और गुंडागर्दी के आरोप में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। यह मामला विधायक से जुड़ा है, इसलिए इस मामले की सुनवाई भोपाल स्थित स्पेशल कोर्ट में हुई है।

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के विधायक और वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय द्वारा निगमकर्मी से मारपीट मामले में जमानत मिल गयी है। इंदौर कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने भोपाल की विशेष अदालत में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी। आकाश विजयवर्गीय को 20-20 हज़ार रुपये के बांड पर बेल मिली है। शुक्रवार को कोर्ट ने इंदौर से केस से जुड़े दस्तावेज मंगवाने के आदेश देते हुए सुनवाई के लिए शनिवार का दिन तय किया था। भाजपा विधायक के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि जिस महिला का मकान तोड़ा जा रहा था वह घटना वाले दिन ढाई बजे निगम अफसरों के खिलाफ बदसलूकी करने की रिपोर्ट लिखवाने गई थी। इसके बावजूद उसकी पुलिस ने सुनवाई नहीं की, जिसके बाद विधायक वहां पहुंचे। पुलिस ने जनप्रतिनिधि की बात सुनने के बजाए उनके खिलाफ ही केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। जबकि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ऐसे मामलों में जांच होनी चाहिए। उनका पक्ष भी सुना जाना चाहिए।

ये है पूरा मामला

ज्ञात हो कि नगर निगम अधिकारी को बल्ले से पीटने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और गुंडागर्दी के आरोप में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। यह मामला विधायक से जुड़ा है, इसलिए इस मामले की सुनवाई भोपाल स्थित स्पेशल कोर्ट में हुई है।