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भाजपा विधायक ने संक्रमण प्रसार के लिए मेडिकल कालेज को जिम्मेदार ठहरा विवाद को दिया जन्म

Bjp Mla Gave Birth To Controversy Blaming Medical College For Spreading Infection

By टीम पर्दाफाश 
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अलीगढ़: भारतीय जनता पार्टी के विधायक ने अलीगढ में कोविड-19 संक्रमण के प्रसार के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कालेज को जिम्मेदार ठहराते हुए नये विवाद को जन्म दे दिया है। हालांकि बाद में विधायक ने सफाई दी कि उनका इरादा अस्पताल को बदनाम करने का नहीं था।

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भाजपा विधायक दलवीर सिंह का बयान प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में छपा और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि मेडिकल कालेज अस्पताल कोरोना वायरस का ‘हब’ बन गया है। सिंह ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से अनुरोध किया है कि वह अस्पताल की कथित चूक की जांच करायें। साथ ही आरोप लगाया कि अस्पताल ने मरीजों के बारे में जिला प्रशासन को समय से अवगत नहीं कराया है। उधर, अस्पताल के डाक्टर विधायक के बयान से हैरत में हैं। उनका कहना है कि ऐसे समय में जबकि डाक्टर चैबीसों घंटे अपने जीवन को दांव पर लगाकर काम कर रहे हैं, इस बयान से उन्हें पीडा पहुंची है। उनका यह भी कहना है कि विधायक के बयान से यदि किसी डाक्टर को किसी अप्रिय घटना का सामना करना पडता है तो पूरी तरह विधायक और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा।

जिलाधिकारी को भेजे पत्र में रेजीडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन के डा. हमजा मलिक ने कहा कि अस्पताल रोजाना लगभग ढाई सौ मरीजों का मुफ्त कोरोना परीक्षण कर रहा है। नोएडा, आगरा, एटा, हाथरस, कासगंज, रामपुर, संभल, मुरादाबाद और बुलंदशहर सहित सात से अधिक जिलों के मरीजों के टेस्ट के लिए यह फ्रंटलाइन विशेष कोरोना अस्पताल है। अकेले अलीगढ जिले की आबादी लगभग 35 लाख है। उक्त पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गयी हैं। डा. हमजा ने संवाददाताओं को बताया कि विधायक को शायद जानकारी नहीं है कि अस्पताल आने वाला संक्रमित व्यक्ति आसानी से वायरस फैला सकता है और इस बारे में किसी को पता भी नहीं लग सकता।

उल्लेखनीय है कि अस्पताल अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से संबद्ध है। एएमयू प्रशासन ने विधायक के बयान की आलोचना की है। एएमयू प्रवक्ता एस किदवई ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि अस्पताल प्रशासन मरीजों और डाक्टरों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठा रहा है। हमने मेडिकल स्टाफ को पीपीई किट प्रदान की है और पिछले सप्ताह से हमने अस्पताल में किसी भी तरह का उपचार कराने आने वाले मरीज के लिए इसे अनिवार्य कर दिया है। किदवई ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि अस्पताल समय पर प्रशासन को सूचित नहीं कर रहा है। जांच मशीनें चैबीसों घंटे चल रही हैं और पहले ही दिन से जिला प्रशासन को हर दिन रिपोर्ट दी जा रही है।

वहीं दूसरी ओर विधायक दलवीर सिंह का कहना है कि मेडिकल कालेज उनके बयान को तोड मरोड कर पेश कर रहा है। मेडिकल कालेज केवल इसी जिले के लिए नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है। उन्होंने कहा कि अगर इस अस्पताल का कामकाज प्रभावित होता है तो इससे बडा संकट पैदा हो सकता है। अस्पताल को बदनाम करने का मेरा विचार नहीं था। विधायक ने कहा कि अस्पताल के कुछ डाक्टरों को संक्रमण हुआ क्योंकि यह मरीजों के जरिए आया।

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मौजूदा संकट इसीलिए पैदा हुआ क्योंकि एक निजी डाक्टर ने मेडिकल कालेज को मरीज की वास्तविक हालत बताये बिना कोरोना संक्रमित को रेफर कर दिया। सिंह ने कहा कि उनकी एक अन्य शिकायत है कि सारा काम जूनियर डाक्टरों पर छोड दिया गया है। वरिष्ठ डाक्टर अपनी निर्धारित भूमिका नहीं निभा रहे हैं। इससे स्वास्थ्य रक्षा पर असर पड रहा है।

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