भाजपा की आंधी रोकने के लिए सामूहिक हिस्सेदारी करेगा विपक्ष

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में शिकस्त खा चुके पूरे विपक्ष ने लगभग मान लिया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी से अकेले पार पाना मुश्किल होगा। ऐसी दशा में सभी विपक्षी दलों का महागबंधन बनने की चर्चा चल निकली है। इस संबंध में सभी प्रमुख दलों के नेताओं ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एकजुटता को ही मोदी को रोकने का फार्मूला मानते हैं। इस संबंध में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मोदी की आंधी को थामने के लिए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल को एक मंच पर आ जाना चाहिए, जबकि रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.मसूद इस संबंध में कहते हैं कि मोदी के खिलाफ 2019 में अकेले लड़ने पर विपक्ष की लुटिया डूब सकती है।




राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव भी इसी मत का पक्षधर है। राजद के अशोक सिंह ने इस मामले में कहा कि विपक्षी दलों को एक मंच पर आकर श्री मोदी को करारा जवाब देना चाहिए। कांग्रेस नेता राजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव में गैर भाजपा दलों को एक साथ मिलकर लड़ना चाहिए ताकि मोदी की बयार को थामा जा सके। श्री सिंह ने कहा कि भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस नेतृत्व को महागठबंधन की पहल करनी चाहिए और इसके लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा अध्यक्ष मायावती, रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह समेत अन्य छोटे-छोटे दलों को भी एक मंच पर लाकर चुनाव लड़ने की रणनीति बनानी चाहिए। इस संबंध में सपा का मत है कि उनकी पार्टी भाजपा से अकेले लड़ने में सक्षम है लेकिन यदि महागठंधन बन जाए तो कोई बुराई नहीं है।




पार्टी का मानना है कि हारने के बावजूद उप्र में सपा को वोट काफी मिले हैं। उप्र विधानसभा की 160 से अधिक ऐसी सीटें हैं जहां सपा दूसरे नंबर पर रही है। इस सबके बावजूद भाजपा को रोकने के लिए गठबंधन बन जाए तो कोई बुराई नहीं है। उप्र विधानसभा चुनाव में भाजपा को 39.7, बसपा को 22.02, सपा को 21.08 और कांग्रेस को 06.02प्रतिशत वोट मिले हैं। तीनों विपक्षी दलों को मिले वोटों का प्रतिशत 50.02 है जो भाजपा के मतों से करीब 11 फीसदी अधिक है। इस सवाल पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सूर्यकांत पांडेय भी वर्तमान राजनीतिक माहौल में महागठबंधन को जरुरी बताते हैं और कहते हैं कि भाजपा को 2019 में सत्ता में आने से रोकने के लिए सभी विपक्षी दलों के एक होने के शिवाय कोई दूसरा रास्ता ही नहीं है।

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