केरल में संघ के लोगों की हो रही हत्याओं पर अब बीजेपी मौन नहीं रहेगी !

दक्षिण भारत के आखिरी छोर पर छोटा सा राज्य केरल आजकल लगातार चर्चाओं में है. लेकिन, ये चर्चा केरल में जारी सियासी हिंसा को लेकर हो रही है. केरल की कम्युनिस्ट सरकार के कार्यकाल में आरएसएस के कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही हत्या को नहीं रोक पाने के कारण राज्य की पी विजयन सरकार सवालों के घेरे में है.

हाल ही में तिरुवनंतपुरम के नजदीक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजेश नाम की हत्या के बाद संघ तिलमिला गया है. 34 साल के राजेश की बर्बरता से हत्या की गई थी जिसमें उसके एक हाथ को काट दिया गया था.

आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने संघ कार्यकर्ता राजेश की हत्या के बाद केरल सरकार को घेरने की पूरी कोशिश है. होसबोले ने केरल की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर दी है. होसबोले ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग भी की है.

दरअसल संघ पहले से ही केरल की हिंसा के मुद्दे को उठाता रहा है. संघ का आरोप रहा है कि उनके कार्यकर्ता राजनीतिक हिंसा के लगातार शिकार होते रहे हैं. लेकिन, केरल की सरकार उस पर ध्यान नहीं देती. खासतौर से केरल में विजयन सरकार आने के बाद तो मामला बेहद गंभीर हो गया है.

हालांकि लेफ्ट की तरफ से बीजेपी और संघ के आरोपों को खारिज किया जाता रहा है. लेकिन, अब बीजेपी और संघ दोनों की तरफ से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी हो रही है. केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है. लिहाजा, सरकार के स्तर से भी दबाव बनाने की तैयारी हो रही है.

बीजेपी का आरोप है कि पिछले 17 महीने में संघ के 17 कार्यकर्ताओं की हत्या हो गई है. लेकिन, केरल की सरकार इस मुद्दे पर मौन है. बीजेपी महासचिव भूपेंद्र यादव ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि पिछले 25 सालों में केरल के अंदर आरएसएस के 85 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है.

बीजेपी से संघ की अपेक्षा भी कुछ इसी तरह की है. संघ चाहता है कि केंद्र में बीजेपी सरकार रहते हुए अगर उसके कार्यकर्ताओं की हत्या पर रोक नहीं लग पाई तो फिर आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

उधर, बीजेपी को भी लगता है कि संघ कार्यकर्ताओं पर लगातार हो रहे हमले के मुद्दे को उठाकर दक्षिण भारत के इस राज्य में अपनी जड़ें मजबूत की जा सकती हैं. लिहाजा लगातार वामपंथ और वामपंथी सरकार को निशाने पर लिया जा रहा है.