नई दिल्ली। सुसाइड गेम ‘ब्लू व्हेल’ अब सरकार के साथ टेक्निकल एक्स्पर्ट्स के लिए परेशानी का सबब बनाता जा रहा है। इस जानलेवा गेम को बैन करने का दवा कर चुकी केंद्र सरकार भी हैरत में है। ब्लू व्हेल से जुड़ी लगातार हो रही घटनाएँ इस बात की तस्दीक करती हैं कि इसे रोक पाना नामुमकिन है। एक तरह परिजनों के दिलो दिमाग में इस गेम का खौफ बढ़ता जा रहा कि कहीं उनका बच्चा भी इस गेम का शिकार ना हो जाये। ब्लू व्हेल गेम को लेकर टेक्निकल एक्स्पर्ट्स की क्या राय है हम आपको बताने जा रहे हैं और पैरेंट्स बच्चों को मौत से गेम से बचाने के लिये क्या सावधानियां बरते।

क्या कहते हैं जानकार-

Blue Whale Challenge Facebook Twitter And Whatsapp :

ऐथिकल एक्सपर्ट जितेन जैन बताते हैं, ब्लू व्हेल गेम को बैन करना नामुमकिन है क्यों कि इंटरनेट पर ऐसा कोई गेम ही नहीं है। इसे फेसबुक, व्हाट्सऐप जैसी सोशल साइट्स पर ग्रुप के जरिये कोई भी शुरू कर सकता है, जोकि एक कम्यूनिटी के माध्यम से संचालित होता है। इस कम्यूनिटी में लोग ऊटपटांग हरकतों से बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं। जरूरत है कि ब्लू व्हेल पर बहस करने की बजाय पैरेंट्स और टीचर्स को जागरूक करें कि वो अपने बच्चों को ऐसे माध्यमों से दूर रखें और उनसे बात करें।

क्या कहता है IT ऐक्ट-

केंद्र सरकार ने ब्लू व्हेल गेम को 11 अगस्त को बैन करने की बात कही। सरकार द्वारा गूगल इंडिया, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और याहू इंडिया को एक ऑर्डर जारी किया था। इसमें सरकार ने इन कंपनियों से ब्लू वेल गेम पर बैन लगाने की बात कही थी।

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट और साइबर एक्सपर्ट विराग गुप्ता के मुताबिक सरकार के आदेश के कोई मायने नहीं हैं, क्योंकि खुद को विज्ञापन प्रतिनिधि मानते हुए ये कंपनियां भारत में व्यापार और कंटेन्ट की कोई कानूनी जवाबदेही नहीं लेतीं। ऐसे में सरकार के इस आदेश से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। विराग का मानना है कि अगर सरकार को कोई गंभीर कदम उठाना है तो उसे सर्विस प्रवाइडरों को इसपर लगाम लगाने के लिए कहना होगा।

वहीं साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल का कहना है, फिलहाल हमारे आईटी ऐक्ट में इस तरह के गेम से निपटने के लिए कोई खास प्रावधान नहीं है। यह एक अनजानी समस्या है, जिससे डील करने के लिए फिलहाल कोई भी एजेंसी सक्षम नहीं है। पवन का मानना है कि ब्लू व्हेल बैन करना किसी भी तकनीकी टूल से मुमकिन नहीं है, ऐसे में लोगों को जागरूक करने के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आता।