नहीं रहे ‘बॉर्डर’ के मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी

नहीं रहे 'बॉर्डर' के मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी
नहीं रहे 'बॉर्डर' के मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी

नई दिल्ली। बॉर्डर फिल्म में जिस मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी का किरदार सनी देओल ने निभाया था, आज उनका निधन हो गया है। 1971 के लोंगेवाला के युद्ध में उनकी सैन्य टुकड़ी ने बेमिसाल बहादुरी का प्रदर्शन किया था। इसी युद्ध पर बॉर्डर फिल्म बनी थी। ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी का निधन मोहाली के एक निजी अस्पातल में हुआ। वह 78 वर्ष के थे। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के समय ब्रिगेडियर चांदपुरी भारतीय सेना में मेजर थे।

Border Movie Real Hero Brigadier Kuldip Singh Chandpuri Passes Away :

ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह का जन्म 22 नवंबर, 1940 को एक गुर्जर सिख परिवार में हुआ था। उनके परिवार का संबंध अविभाजित भारत के पंजाब में मोंटागोमरी से था। उनके जन्म के बाद उनका परिवार बालाचौर के चांदपुर रूड़की शिफ्ट हो गया था।

1962 में हुए थे सेना में भर्ती

कुलदीप सिंह 1962 में भारतीय सेना में शामिल हुए। उन्होंने चेन्‍नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से कमीशन प्राप्त किया और पंजाब रेजीमेंट की 23वीं बटालियन का हिस्सा बने। उन्होंने 1965 और 1971 के युद्ध में भाग लिया। जंग में उनकी वीरता को काफी सराहना मिली। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन बल में सालभर तक गाजा में सेवाएं दीं। दो बार मध्‍यप्रदेश के महू इन्फैंट्री स्कूल में इन्स्ट्रक्टर भी रहे।

120 बहादुरों के साथ लड़ी गई लौंगेवाला की लड़ाई

1971 की लड़ाई के समय मेजर चांदपुरी को पंजाब रेजीमेंट की 23वीं बटालियन को लीड करने की जिम्‍मेदारी दी गई। इससे पहले वह 1965 की लड़ाई में भी पाक सेना को धूल चंटा चुके थे। मेजर चांदपुरी के पास सिर्फ 120 लोगों का ट्रूप था तो सामने थे पाक की 51वीं इंफ्रेंटी ब्रिगेड के 2000 से 3000 सैनिक जिसके साथ 22वीं आर्म्‍ड रेजीमेंट की भी मदद मिल रही थी।

पांच दिसंबर 1971 को एकदम तड़के दुश्‍मन ने भारतीय सेना पर हमला बोल दिया। हालात मुश्किल थे और फिर भी मेजर चांदपुरी को इन हालातों का सामना करना था। पूरी रात उन्‍होंने 120 लोगों की कंपनी के साथ दुश्‍मनों का मुकाबला किया।

नई दिल्ली। बॉर्डर फिल्म में जिस मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी का किरदार सनी देओल ने निभाया था, आज उनका निधन हो गया है। 1971 के लोंगेवाला के युद्ध में उनकी सैन्य टुकड़ी ने बेमिसाल बहादुरी का प्रदर्शन किया था। इसी युद्ध पर बॉर्डर फिल्म बनी थी। ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी का निधन मोहाली के एक निजी अस्पातल में हुआ। वह 78 वर्ष के थे। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के समय ब्रिगेडियर चांदपुरी भारतीय सेना में मेजर थे। ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह का जन्म 22 नवंबर, 1940 को एक गुर्जर सिख परिवार में हुआ था। उनके परिवार का संबंध अविभाजित भारत के पंजाब में मोंटागोमरी से था। उनके जन्म के बाद उनका परिवार बालाचौर के चांदपुर रूड़की शिफ्ट हो गया था।

1962 में हुए थे सेना में भर्ती

कुलदीप सिंह 1962 में भारतीय सेना में शामिल हुए। उन्होंने चेन्‍नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से कमीशन प्राप्त किया और पंजाब रेजीमेंट की 23वीं बटालियन का हिस्सा बने। उन्होंने 1965 और 1971 के युद्ध में भाग लिया। जंग में उनकी वीरता को काफी सराहना मिली। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन बल में सालभर तक गाजा में सेवाएं दीं। दो बार मध्‍यप्रदेश के महू इन्फैंट्री स्कूल में इन्स्ट्रक्टर भी रहे।

120 बहादुरों के साथ लड़ी गई लौंगेवाला की लड़ाई

1971 की लड़ाई के समय मेजर चांदपुरी को पंजाब रेजीमेंट की 23वीं बटालियन को लीड करने की जिम्‍मेदारी दी गई। इससे पहले वह 1965 की लड़ाई में भी पाक सेना को धूल चंटा चुके थे। मेजर चांदपुरी के पास सिर्फ 120 लोगों का ट्रूप था तो सामने थे पाक की 51वीं इंफ्रेंटी ब्रिगेड के 2000 से 3000 सैनिक जिसके साथ 22वीं आर्म्‍ड रेजीमेंट की भी मदद मिल रही थी। पांच दिसंबर 1971 को एकदम तड़के दुश्‍मन ने भारतीय सेना पर हमला बोल दिया। हालात मुश्किल थे और फिर भी मेजर चांदपुरी को इन हालातों का सामना करना था। पूरी रात उन्‍होंने 120 लोगों की कंपनी के साथ दुश्‍मनों का मुकाबला किया।