BRD अस्पताल से पहले KGMU में 11 मासूमों की गयी थी जान, नहीं लिया सबक

लखनऊ। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के चुनावी क्षेत्र गोरखपुर में 33 बच्चों की मौत के मामले ने प्रदेश में हड़कंप मचा रखा है। अभी जिम्मेदार लोग महज जांच की बात कहकर अपना पल्ला झाड रहे हैं। वहीं मामले को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं और राजनीतिक पटियां सियासी रोटियां सेकने में जुट गयी हैं। आपको बताते चलें कि यूपी में इससे पहले भी कुछ ऐसा ही मामला हो चुका है, जिसमें 11 मासूमों की सांसे थम गयी थी। ये घटना राजधानी लखनऊ के केजीएमयू में घटित हुई थी। साल 2001 में हुई इस घटना ने राजधानी को हिला कर रख दिया था। कई अफसर निशाने पर आए थे, बड़े-बड़े दावे हुए थे। पर, इन सब के बाद भी महकमे ने कोई सबक नहीं लिया।

इस घटना के बाद तमाम ऐसी घटनाएं हुईं जहां मरीजों को खाली ऑक्सीजन सिलेण्डर लगा दिया गया जिससे उनकी मौत हुई। मौजूदा समय में भी लखनऊ के अस्पतालों की सूरत जस की तस है। लापरवाही से मासूमों की जान खतरे में सिविल अस्पताल में करीब चार साल पहले बच्चों को एक छत के नीचे बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए एनआईसीयू बनाने की कवायद शुरू हुई। इसमें 10 बेड की वेंटिलेटर यूनिट भी बनाई जानी थी। बाल रोग विभाग के लिए सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट स्वीकृत हुए। इसके लिए ढाई करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित हुआ। इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के मुख्य औषधि भंडार को दी गई। चार साल बाद भी अस्पताल में एनआईसीयू नहीं बन पाया। ऑक्सीजन प्लांट भी नहीं बन पाया। नतीजतन सिलेंडर से मासूमों को ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है।

केजीएमयू के हाल भी बेहाल-

केजीएमयू में कभी भी ऑक्सीजन की सप्लाई ठप हो सकती है। गोरखपुर की तरह यहां भी कंपनियों के भुगतान में लेटलतीफी हो रही है। कपंनियों के अधिकारी इस बात को लेकर नाखुश हैं। बेड के लिहाज से केजीएमयू एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल हैं। इसमें 5400 बेड हैं। ज्यादातर बेड भरे रहते हैं।

केजीएमयू के बाल रोग में लगी आग-

बताते चलें कि बीती 16 जुलाई को केजीएमयू के बाल रोग विभाग में अचानक आग लगने से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया था। ट्रॉमा सेंटर में फायर फाइटिंग के लिए लगी कोई भी मशीन आग लगने के बाद काम नहीं आई न ही कोई फायर अलार्म बजा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमिश्नर अनिल गर्ग को ट्रॉमा सेंटर में लगी आग की जांच सौंपी है। सीएम ने उनसे तीन दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा था लेकिन अभी तक इस मामले की जांच रिपोर्ट नहीं आयी है।