बीआरडी मेडिकल कालेज मामला, लापरवाही या सामूहिक हत्या

लखनऊ। ये यूपी है साहब, यहां की सरकार सपने बेंचती है। यूपी के अस्पतालों में आॅक्सीजन की कमी से 30 मासूम मर जाते हैं, और सरकार कहती है कि मीडिया में भ्रामक खबरें चल रहीं हैं। सवाल उठता है कि भ्रम कौन फैला रहा है। जमीन पर हकीकत की तहकीकात करने वाले पत्रकार या फिर एसी दफ्तरों में बैठकर लापरवाही बरतने के बाद झूठे बोलते हैं।

यूपी की योगी सरकार की सबसे बड़ी परेशानी ये है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश को बदलने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं लेकिन उनके सिपहसलार और नौकरशाह अपनी फितरत को बदलने को तैयार नहीं हैं।

केवल गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में पांच दिनों के भीतर हुई 60 से अधिक मौतों की बात की जाए तो मुख्यमंत्री योगी ने 72 घंटे पहले इस मेडिकल कालेज का दौरा किया था। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले ही इस मेडिकल कालेज में मरीजों के लिए सुविधाएं बद्हाल थीं। जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से तमाम बातों पर पर्दा डालकर रखा गया।

सूत्रों की माने तो बीआरडी मेडिकल कालेज में पिछले चार दिनों से यानी 8 अगस्त से मौतों का सिलसिला जारी था। लेकिन 9 अगस्त को सीएम योगी के दौरे को लेकर जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने पूरे मामले को दबाए रखा। शुक्रवार को लगातार हुई तीस मौतों के बाद मामला पूरी तरह से अस्पताल और जिला प्रसाशन के बस से बाहर हो गया।

मीडिया के सामने आए तथ्यों के मुताबिक अस्पताल में आॅक्सीजन की सप्लाई ठप होने के चलते मेडिकल कालेज में मौतों का सिलसिला शुरू हुआ। मेडिकल कालेज के जूनियर डॉक्टर मरीजों के पास मौजूद रहकर उनकी नब्ज को मॉनीटर कर रहे थे और सीनियर डॉक्टर फोन पर पूरे हालातों की जानकारी होने के बावजूद सामने आने को तैयार नहीं थे।

एक दैनिक समाचार की रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल कालेज के चार बार्डों में आॅक्सीजन की सप्लाई ठप हो गई थी। जिसमें दो बार्ड बच्चों के थे। एक बार्ड में नवजात बच्चे थे तो दूसरे में इंसेफेलाइटिस (जेई) संक्रमित बच्चे थे। जबकिे अन्य दो वार्डों में परिजनों ने अपने बच्चों की सांसों का थमते हुए देखा, दम तोड़ते बच्चों के पास जूनियर डॉक्टरों को पूरा मामला समझ आ रहा था, लेकिन अस्पताल का कोई सीनियर डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं था।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज ने आॅक्सीजन की कमी को नकारा—

30 मासूमों की मौत के बाद जब आॅक्सीजन की कमी की बात सामने आई, तो मेडिकल कालेज की ओर से इस बात को सिरे से नकार दिया गया। लेकिन मेडिकल कालेज में आकस्मिक आॅक्सीजन स्टॉक को खत्म होने की पुष्टि होने के बाद गोरखपुर के जिलाधिकारी ने अपने बयान में बताया आॅक्सीजन सप्लायर कंपनी के भुगतान न होने की बात कही।

यूपी सरकार ने केवल सात मौतों की पुष्टि की—

यूपी सरकार ने इस मामले में शुक्रवार की रात एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केवल सात बच्चों की मौत होने की बात कही है। इन मौतों की वजह जेई संक्रमण को बताया गया है। सरकार की ओर से आॅक्सीजन की कमी होने की बात को मीडिया की भ्रामण रिपोर्ट करार दिया गया है।

हत्या का मामला हो दर्ज—

अगर मीडिया रिपोर्ट्स में समाने आए तथ्यों और अधिकारियों के बयानों की निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी लापरवाह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करना चाहिए। अगर मीडिया आरोप सही पाए जाते हैं तो इन अधिकारियों के खिलाफ सामूहिक हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।