बीआरडी मेडिकल कॉलेज हादसे का लखनऊ कनेक्शन, कमीशन के लिए रोका गया पेमेंट

लखनऊ। चार दिनों में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में हुई 60 से ज्यादा मौतों ने यूपी के सरकारी मेडिकल कालेजों में चलने वाले कमीशनबाजी के नेटवर्क को उजागर करने का काम किया है। बीआरडी मेडिकल कालेज में हुई लगातार मौतों के लिए आॅक्सीजन सप्लाई को सरकार भले ही मौतों के कारण के तौर पर देखने को तैयार न हो, लेकिन यह जरूर स्पष्ट हो चला है कि आॅक्सीजन की सप्लाई को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन से लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव कार्यालय तक घोर लापरवाही बरती गई। कंपनी बार बार अपने पेमेंट के लिए पत्राचार करती रही, लीगल नोटिस भेजती रही, मगर सिस्टम में कमीशन के खाने में हरा टिक न लगने की वजह से पेमेंट नहीं किया गया।

लखनऊ से प्रकाशित एक दैनिक अखबार ने अपनी खबर में खुलासा किया है कि बीआरडी मेडिकल कालेज के खाते में पहले से 1.86 करोड़ रूपया मौजूद था। आॅक्सीजन सप्लायर कंपनी की उधारी मात्र 69 लाख थी, जिसे आसानी से चुकाया जा सकता था। कंपनी की ओर से बनाए जा रहे दबाव और इंसेफेलाइटिस के बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए कालेज प्रशासन की ओर से कंपनी को पेमेंट किए जाने की तैयारी भी की गई, लेकिन लखनऊ से पहुंचे एक फोन ने पेमेंट को रुकवा दिया।

{ यह भी पढ़ें:- गोरखपुर कांड: पुष्पा सेल्स का मालिक मनीष भंडारी गिरफ्तार }

इस रिपोर्ट में भले ही यह स्पष्ट न किया गया हो कि फोन लखनऊ के किस दफ्तर से गया था, लेकिन शासन और सरकार को इस बात का भान पूरी तरह से है कि फोन के माध्यम से किया गया हस्तक्षेप किसका था। इस हस्तक्षेप का अहम कारण कमीशनबाजी थी, इस बात की जानकारी नीचे से लेकर विभागीय मंत्री आशुतोष टंडन तक को है।

{ यह भी पढ़ें:- मासूमों की कब्रगाह बने सरकारी अस्पताल, यूपी के बाद महाराष्ट्र में 55 नवजातों की थमी सांसे }