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ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने निजाम के 306 करोड़ रु पर पाकिस्तान का दावा खारिज किया, भारत के पक्ष में फैसला दिया

By बलराम सिंह 
Updated Date

British High Court Rejects Pakistans Claim Of Nizams Rs 306 Crore Gives Verdict In Favor Of India

नई दिल्ली। हैदराबाद के निजाम के करोड़ों रुपए को लेकर भारत-पाक के बीच 71 सालों से चले आ रहे विवाद का बुधवार को अंत हो गया। ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने पाकिस्तान को झटका देते हुए फैसला सुनाया कि इस रकम पर भारत और निजाम के उत्तराधिकारियों का हक है।

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निजाम के वंशज प्रिंस मुकर्रम जाह और उनके छोटे भाई मुफ्फखम जाह इस लड़ाई में भारत सरकार के साथ थे। अदालत ने पाकिस्तान के दावों को खारिज कर इसे प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। लंदन के रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस के जज मार्कस स्मिथ ने अपने फैसले में कहा कि हैदराबाद के सातवें निजाम उस्मान अली खान इस धनराशि के मालिक थे। निजाम के बाद उनके वंशज और भारत इस रकम के दावेदार हैं।

हैदराबाद के निजाम की ओर से मुकदमे की पैरवी कर रहे पॉल हेविट ने कहा कि हमें खुशी है कि अदालत ने अपने फैसले में निजाम की संपत्ति के लिए उनके वंशजों के उत्तराधिकार को स्वीकार किया है। बता दें कि हैदराबाद के तत्कालीन निजाम ने 1948 में ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को ये रकम भेजी थी।

दरअसल देश के विभाजन के दौरान हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली खान थे। 1948 में निजाम ने लंदन में तत्कालीन पाकिस्तान उच्चायुक्त रहिमतुल्ला के पास करीब 1 मिलियन पाउंड की रकम सुरक्षित रूप से रखने के लिए भेजी। उस वक्त हैदराबाद में निजाम का शासन था। वो भारत सरकार के अधीन नहीं था। हालांकि कुछ ही दिनों बाद निजाम ने धनराशि को अपनी सहमति के बिना भेजे जाने की बात कही और बैंक से अपना पैसा वापस लौटाने के लिए कहा। लेकिन बैंक ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वो रकम किसी और खाते में थी। बैंक का कहना था कि फंड पाकिस्तान के खाते में जा चुका है, ऐसे में उनकी सहमति के लिए इसे बिना वापस नहीं किया जा सकता।

बैंक के पैसा लौटाने से इनकार करने के बाद 1950 के दशक में निजाम ने बैंक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। यह मामला हाउस ऑफ लॉर्ड्स तक पहुंच गया, जहां उस वक्त फंड के स्वामित्व पर फैसला नहीं हो सका, क्योंकि पाकिस्तान ने संप्रभु प्रतिरक्षा का दावा कर दिया। इसके बाद से ही ये पैसा यूके के नेटवेस्ट बैंक में फ्रीज पड़ा हुआ था। जो अब बढ़कर करीब 35 मिलियन पाउंड यानी करीब 306 करोड़ रुपए हो गया।

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6 साल पहले दोबारा शुरू हुई सुनवाई

साल 2013 में पाकिस्तान ने इस फंड की राशि पर अपना दावा करते हुए केस की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए अपनी संप्रभु प्रतिरक्षा को हटा लिया। केस में दोबारा कार्रवाई शुरू होने के बाद निजाम परिवार और भारत सरकार के बीच इस मामले को लेकर एक समझौता हुआ और भारत ने इन पैसों पर निजाम परिवार के दावे का समर्थन किया। यूके हाईकोर्ट में पाकिस्तान सरकार का दावा खारिज किया गया। फंड पर हैदराबाद के निजाम परिवार का मालिकाना अधिकार बताया गया।

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