‘माया’ के बदले सुरों से राजनैतिक जगत में हलचल तेज, शुरू हुआ कयासों का दौर

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बसपा चीफ मायावती बोलीं, दिल्ली के सीएम का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी(बसपा) की मुखिया बीते कई दिनों से कांग्रेस पार्टी पर हमलावर हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए बसों को लेकर योगी सरकार और कांग्रेस में जमकर चिट्ठीबाजी हुई थी। हालांकि मायावती यूपी और केंद्र की सत्ताधारी भाजपा सरकार के मुद्दों पर अक्सर सोशल मीडिया पर निशाना साधती रही हैं लेकिन बीते कुछ दिनों से मायावती के रुख में कुछ बदलाव नजर आया है। मायावती राजस्थान सरकार द्वारा यूपी को भेजे गए बिल को लेकर भी हमलावर नजर आयीं।

Bsp Chief Mayawati Supports Bjp :

मायावती पहली बार कोटा से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों के छात्रों को भेजने के मामले पर कांग्रेस के विरोध में आईं। बताते चलें कि कांग्रेस ने जिस तरह का व्यवहार मायावती के साथ राजस्थान में किया है, उसके बाद मायावती का नाराज होना लाजमी है। जिस बसपा के समर्थन से राजस्थान में कांग्रेस ने सरकार बनाई और कुछ दिनों बाद उसी बसपा के सारे विधायकों का अशोक गहलोत ने अपनी पार्टी में विलय करा लिया। उसके बाद से ही लगने लगा था कि आने वाले समय में मायावती और कांग्रेस के रिश्ते ठीक नहीं रहने वाले हैं लेकिन क्या सिर्फ इस मामले को लेकर मायावती और कांग्रेस में इतनी तल्खी हो गई है, क्योंकि बसपा के विधायकों का राजस्थान और मध्य प्रदेश में सत्ता दल के साथ विलय का तो इतिहास ही रहा है।

दूसरी तरफ राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने यूपी सरकार को 36.36 लाख रुपये का बिल भेजकर नया विवाद खड़ा कर दिया। यह बिल कोटा से यूपी लाए गए बच्चों के लिए 70 बसें उपलब्ध करवाने को लेकर भेजा गया है। राजस्थान सरकार के इस कदम के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे लेकर कांग्रेस को खूब खरी-खोटी सुनाई। मायावती ने ट्वीट किया, राजस्थान की कांग्रेस सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवक-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपये और देने की जो मांग की गई है, वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखद है। 

इन सबके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि भाजपा के मुद्दों को लेकर अक्सर विरोधी सुर में रहने वाली मायावती का मिजाज बदला क्यों नजर आ रहा है। चर्चा इस बात की भी है कि मायावती अपने राजनीतिक करियर को बचाने के लिए आने वाले समय में भाजपा से हाथ मिला सकती हैं। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है, इस बात का फैसला तो आने वाले समय में ही होगा।

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी(बसपा) की मुखिया बीते कई दिनों से कांग्रेस पार्टी पर हमलावर हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए बसों को लेकर योगी सरकार और कांग्रेस में जमकर चिट्ठीबाजी हुई थी। हालांकि मायावती यूपी और केंद्र की सत्ताधारी भाजपा सरकार के मुद्दों पर अक्सर सोशल मीडिया पर निशाना साधती रही हैं लेकिन बीते कुछ दिनों से मायावती के रुख में कुछ बदलाव नजर आया है। मायावती राजस्थान सरकार द्वारा यूपी को भेजे गए बिल को लेकर भी हमलावर नजर आयीं। मायावती पहली बार कोटा से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों के छात्रों को भेजने के मामले पर कांग्रेस के विरोध में आईं। बताते चलें कि कांग्रेस ने जिस तरह का व्यवहार मायावती के साथ राजस्थान में किया है, उसके बाद मायावती का नाराज होना लाजमी है। जिस बसपा के समर्थन से राजस्थान में कांग्रेस ने सरकार बनाई और कुछ दिनों बाद उसी बसपा के सारे विधायकों का अशोक गहलोत ने अपनी पार्टी में विलय करा लिया। उसके बाद से ही लगने लगा था कि आने वाले समय में मायावती और कांग्रेस के रिश्ते ठीक नहीं रहने वाले हैं लेकिन क्या सिर्फ इस मामले को लेकर मायावती और कांग्रेस में इतनी तल्खी हो गई है, क्योंकि बसपा के विधायकों का राजस्थान और मध्य प्रदेश में सत्ता दल के साथ विलय का तो इतिहास ही रहा है। दूसरी तरफ राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने यूपी सरकार को 36.36 लाख रुपये का बिल भेजकर नया विवाद खड़ा कर दिया। यह बिल कोटा से यूपी लाए गए बच्चों के लिए 70 बसें उपलब्ध करवाने को लेकर भेजा गया है। राजस्थान सरकार के इस कदम के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे लेकर कांग्रेस को खूब खरी-खोटी सुनाई। मायावती ने ट्वीट किया, राजस्थान की कांग्रेस सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवक-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपये और देने की जो मांग की गई है, वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखद है।  इन सबके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि भाजपा के मुद्दों को लेकर अक्सर विरोधी सुर में रहने वाली मायावती का मिजाज बदला क्यों नजर आ रहा है। चर्चा इस बात की भी है कि मायावती अपने राजनीतिक करियर को बचाने के लिए आने वाले समय में भाजपा से हाथ मिला सकती हैं। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है, इस बात का फैसला तो आने वाले समय में ही होगा।