उप्रः बरामद किया गांजा, देशी रायफल और चोरी की बाइक में भेजा जेल!

बांदा। उत्तर प्रदेश में बांदा जिले की पुलिस बहुत ही कश्मिाई है। बिसंड़ा थाना की ओरन चैकी की पुलिस ने जिस युवक दिलीप सिंह को तीन दिन पूर्व देशी रायफल और चोरी की बाइक रखने के आरोप में जेल भेजा है, दरअसल उसके घर से पांच दिन पूर्व गांजा के दो हरे पेड़ बरामद हुए थे और यह देशी रायफल व चोरी की बाइक जुलाई माह में तेंदुरा गांव में कोदा माली के पुरवा के पास पुलिस पर गोली चलाकर छोड़ कर भागे बदमाशों की थीं, जो अब तक पुलिस के पास रही। यह खुलासा तेंदुरा के ग्रामीणों ने इस संवाददाता से बुधवार को की है।




पुलिस चैकी ओरन में रात गुजार चुके एक गांव के चैकीदार ने मंगलवार को सिपाहियों पर गांजा और अवैध असलहा बेंचने का जो खुलासा किया था, उसकी पुष्टि तेंदुरा गांव के ग्रामीण भी करते हैं। इस गांव के ग्रामीणों की मानें तो पुलिस की मेहरबानी से गांव के कई लोग इस अवैध कारोबार से जुड़े हैं। जो भी पुलिस का विरोध करता है, उसे हवालात या जेल की सलाखों में भेज दिया जाता है। तेंदुरा गांव के नगरिहा पुरवा के युवक दिलीप सिंह पुत्र राममिलन सिंह को तीन दिन पूर्व देशी रायफल और चोरी की बाइक रखने के कथित आरोप में जेल भेजने वाली ओरन पुलिस की परत-दर-परत कलई खुल रही है।

दरअसल, पुलिस को तेंदुरा गांव के नगरिहा पुरवा निवासी दिलीप सिंह के घर में गांजा की खेती करने की सूचना मिली थी, पुलिस ने पांच दिन पूर्व उसके घर में छापा डाला तो गांजा के दो हरे पेड़ बरामद हुए थे, छापामारी के दौरान दिलीप घर से भाग गया था और पुलिस एक बोरा में गांजा भर कर चैकी ले गई थी। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए गांव के ही शिवराम मिश्रा को लगाया था, पुलिस के कथनानुसार उसने तीन दिन पूर्व दिलीप को मिट्टी का तेल लेने के बहाने कछिया पुरवा कोटेदार के यहां ले गया और वहीं से फोन पर चैकी पुलिस को सूचित किया। तभी ओरन पुलिस पहुंच कर उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। इस बीच चलती मोटरसाइकिल से शिवराम और दिलीप कूद पड़े, बाइक गिरने शिवराम के दाहिने पैर के पंजे में चोंट आई और सिपाही का पैर भी जख्मी हो गया है। शिवराम बताता है कि ‘चैकी इंचार्ज ने ओरन की एक निजी अस्पताल में उसका इलाज कराकर छोड़ दिया, लेकिन दिलीप को चैकी में पहले से रखी देशी रायफल और चोरी की बाइक की बरामदगी दिखा कर जेल भेज दिया।’

घर में गांजा के हरे दो पेड़ की बरामदगी दिलीप का पिता राममिलन भी स्वीकार करता है। उसने बताया कि ‘घर के पिछवाड़े अपने आप गांजा के दो पेड़ उग आए थे, जिसे पांच-छह दिन पहले ओरन पुलिस उखाड़ ले गई थी।’ लेकिन पुलिस ने रायफल और चोरी की बाइक के साथ बेटे का चालान कर उसकी जिंदगी बर्वाद कर दिया है।’गांव के कई ग्रामीणों ने बताया कि ‘जुलाई माह में कोदा माली के पुरवा के पास कुछ बदमाश बैठे थे, तभी ओरन चैकी की पुलिस वहां पहुंच गई। बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर जल्दबाजी में एक देशी रायफल और बिना नंबर की बाइक छोड़ कर भाग गए थे, जिसे पुलिस अपने साथ ले गई थी। उन्होंने बताया कि ‘इसी बाइक से एक सिपाही अक्सर गश्त में गांव आया-जाया करता था।’ पुलिस के दस्तावेजों में बदमाशों द्वारा फायरिंग करना और देशी रायफल व चोरी की बाइक बरामद होने का अब तक जिक्र नहीं किया गया था और न ही आला अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया।




सबसे बड़ा पहला सवाल यह है कि पुलिस ने अज्ञात बदमाशों से रायफल व चोरी की बाइक बरामदगी क्यों नहीं दिखायी थी और सिपाही इस बाइक का इस्तेमाल अब तक क्यों करता रहा? दूसरा सवाल यह कि दिलीप के घर जब हरा गांजा बरामद हुआ तो उसे असलहा और चोरी की बाइक रखने के इल्जाम में जेल भेजने की मजबूरी क्या थी? सबसे अहम सवाल यह है कि किसी ग्रामीण के घर में अधिकारी या अदालत के आदेश के बिना छापेमारी करना क्या मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है? इन तमाम सवालों का जवाब देने के लिए कोई भी पुलिस अधिकारी तैयार नहीं है, शायद यही वजह है कि आम लोगों का विश्वास पुलिस से उठता जा रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि बुधवार सुबह तक चैकी में गांजा रखा था, मीडिया में खबर आने के बाद पुलिस इसे हटा या बेंच सकती है। जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि पूरे मामले की जांच ‘एलआईयू’ या अन्य एजेंसी से कराकर जन विश्वास हासिल करें।

बाँदा से आर जयन की रिपोर्ट