बुंदेलखंड़ः विधानसभा चुनाव में बसपा से किनारा करेंगे दलित!

Bundelkhand News

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल तो सक्रिय ही हैं, मगर सामाजिक संगठन भी पीछे नहीं हैं। इनमें एक संगठन ‘पब्लिक एक्शन कमेटी’ (पीएसी) है, जिसने खुद के सर्वेक्षण के जरिए दावा किया है कि ‘बुंदेलखंड़ में अगले विधानसभा चुनाव में दलित वर्ग में शामिल कई जातियां बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से किनारा करने का मन बनाया है।




‘पब्लिक एक्शन कमेटी’ (पीएसी) की प्रमुख श्वेता ने संगठन द्वारा अक्टूबर माह में तैयार की गयी सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश करते हुए यहां ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ‘यह सर्वेक्षण बुंदेलखंड़ के सभी सात जनपदों बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी व ललितपुर की उन्नीस विधानसभा सीटों में अहम भूमिका निभाने वाली दलित वर्ग में शामिल कोरी, कुछबंधिया, खटिक, भाट, मेहतर, बसोर, सहरिया, धोबी व पासी जैसी जातियों पर आधारित है, जो कभी बसपा का वोट बैंक हुआ करती थीं।’ उन्होंने बताया कि ‘हर विधानसभा क्षेत्र में इन जातियों से ताल्लुक रखने वाले पचास महिला और पचास पुरुषों से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के बाद तैयार की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर दावा किया जा सकता है कि अगले विधानसभा चुनाव में वह बसपा के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे।’

‘पीएसी’ के अनुसार, ‘ज्यादातर लोगों का मत था कि सूबे में बसपा सरकार बनने पर दलित वर्ग की एक विशेष कौम को ही तवज्जव दी जाती है। बसपा अब कांशीराम के नारे ‘जिसकी जितनी भागेदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ को दफन कर चुकी है।’ बकौल श्वेता, ‘दलित वर्ग की यह कौमें सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) से भी दूरियां बनाए हुए है और भाजपा या फिर कांग्रेस अथवा किसी नवोदय राजनीतिक दल की ओर रुख कर सकती हैं।’ पीएसी प्रमुख का कहना है कि ‘सर्वेक्षण के दौरान ज्यादातर इन दलित वर्गों के लोग राजनीतिक हिस्सेदारी न मिलने पर बसपा से खासे नाराज दिखे, कई लोगों का कहना था कि जिला पंचायत व विधानसभा की सभी सुरक्षित सीटों में भी बसपा प्रमुख अपने ‘स्वजातीय’ उम्मीदवार को ही मौका देती हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘संगठन एक ऐसा ही सर्वेक्षण पिछड़े वर्ग के मध्य भी करा रहा है।’




उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड़ बसपा का गढ़ रहा है और अपवाद स्वरूप पिछड़े वर्ग के यादव और सामान्य वर्ग के ठाकुर व ब्राह्मण को छोड़ दिया जाए तो वामपंथ आन्दोलन की समाप्ति के बाद यहां ज्यादातर दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाता बसपा का ही वोट बैंक माना जाता रहा है। समूचे बुंदेलखंड़ में करीब सात लाख ऐसे दलित मतदाता है, जो राजनीतिक उपेक्षा के शिकार रहे हैं। अगर पीएसी के सर्वेक्षण रिपोर्ट पर भरोसा किया जाए तो बुंदेलखंड़ में बसपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बांदा से राम लाल जयन की रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल तो सक्रिय ही हैं, मगर सामाजिक संगठन भी पीछे नहीं हैं। इनमें एक संगठन ‘पब्लिक एक्शन कमेटी’ (पीएसी) है, जिसने खुद के सर्वेक्षण के जरिए दावा किया है कि ‘बुंदेलखंड़ में अगले विधानसभा चुनाव में दलित वर्ग में शामिल कई जातियां बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से किनारा करने का मन बनाया है। ‘पब्लिक एक्शन कमेटी’ (पीएसी) की प्रमुख श्वेता ने संगठन द्वारा…