नई दिल्ली। इन दिनों बिजनेसमैन विजयपत सिंघानिया का नाम सुर्खियों में है। जिसकी वजह बना है उनका पाई—पाई को मोहताज होना। उनकी हालत इतनी खराब है कि उन्हें अपनी जिन्दगी किराए के मकान में गुजारनी पड़ रही है। उनकी इस हालत की वजह कोई और नहीं उनका अपना बेटा गौतम सिंघानिया है, जिसे उन्होंने अपने 1000 करोड़ के शेयर ट्रांसफर कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था।

बताया जा रहा है कि विजयपत सिंघानिया ने मुंबई हाईकोर्ट में गौतम सिंघानिया के खिलाफ याचिका दाखिल कर मुंबई​ स्थित जेके हाउस में डूपलेक्स हासिल करने की अपील की है। सिंघानिया का कहना है कि गौतम सिंघानिया के स्वामित्व वाली रेमंड कंपनी और उनके परिवार के बीच एक कानूनी करार हुआ था जिसके मुताबिक जेके हाउस में चार डूप्लेक्स में से एक विजयपत सिंघानिया को, जबकि तीन अन्य पर उनके भाई की पत्नी वीना देवी और उनके दो बेटों अनंत और अक्षयपत को रहने के लिए दिए गए थे।

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इन सभी को गौतम सिंघानिया ने जेके हाउस को तोड़कर नया निर्माण करने की बात कह कर डूप्लेक्स खाली करवाए थे। जेके हाउस का पुराना स्ट्रक्चर तोड़ तो दिया गया लेकिन उसकी जगह केवल गौतम सिंघानिया अपना बंगला बनाने जा रहे हैं। यह बंगला मुकेश अंबानी के अंटिला से भी 10 मंजिल ऊंचा होगा।

अपने बेटे के साथ विवाद को लेकर विजयपत सिंघानिया कहते हैं कि उन्होंने अपनी जिन्दगी में जो कुछ कमाया था, सब कुछ फरवरी 2015 में रेमंड कंपनी के स्वामित्व के साथ गौतम सिंघानिया को सौंप दिया था। यही उनकी सबसे बड़ी गलती थी। यह फैसला लेते समय तक उन्हें यह नहीं मालूम था कि उनका बेटा ऐसी नियत रखता है।

एक अखबार को दिए वक्तव्य में विजयपत सिंघानिया के वकील का कहना है कि रेमंड कंपनी के दो कर्मचारियों ने कंपनी और सिंघानिया परिवार के बीच चारों डूप्लेक्सों को लेकर हुए एग्रीमेंट वाली फाइल को गायब कर दिया है। परिवार के लोगों का कहना है कि इस मामले को लेकर रेमंड कंपनी की बोर्ड मीटिंग में चर्चा की जा चुकी है। जिसमें 95 प्रतिशत शेयरहोल्डर्स ने डूप्लेक्स दिए जाने का विरोध किया है।

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विजयपत सिंघानिया का कहना है​ कि इस मामले को शेयरहोल्डर्स के बीच तक ले जाना ही नहीं चाहिए था। उनका दावा मजबूत है, वह इसे अदालत में चुनौती देंगे उम्मीद है कि मामला आर्बिटेशन में जाएगा और उन्हें राहत मिलेगी। इस मामले में गौतम सिंघानिया को पार्टी न बनाकर रेमंड्स और पश्मीना होर्डिंग्स को पार्टी बनाया गया है।