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बेंगलुरु में हो रहा था CAA का विरोध, DCP ने गाया एक गाना और चुपचाप लौट गए प्रदर्शनकारी

Caa Protesting In Bengaluru Dcp Sang A Song And Silently Returned Protesters

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। नागरिकता कानून (Citizenship Act) के विरोध में देशभर में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में पथराव और आगजनी की खबरें सुनाई दे रही हैं। इन सबके बीच बेंगलुरु (Bengaluru) के टाउनहॉल से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने साबित किया है कि हम भारतीय हैं। ऐसा ही वाकया बेंगलुरु में देखने को मिला। यहां डीसीपी (सेंट्रल) चेतन सिंह राठौर ने माइक से राष्ट्र गान गाकर भीड़ को नियंत्रित किया। इसके बाद ज्यादातर प्रदर्शनकारी प्रदर्शन स्थल से चले गए।    
 
बेंगलुरु में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक…

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बेंगलुरु में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक अलग ही वाक्या नजर आया। बेंगलुरु की सड़क पर प्रदर्शनकारियों का हल्ला बोल जारी था। तब बेंगलुरु (मध्य) के डीसीपी चेतन सिंह राठौर ने हाथ में माइक लेकर मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से चले जाने की अपील की। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया। जिसके बाद उन्होंने कहा कि अब मैं एक गाना गाऊंगा जिसमें मेरे सारे देशवासी मेरे साथ खड़े होंगे। जिसके बाद डीएसपी ने राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया और सभी प्रदर्शनकारी खड़े हो गए। राष्ट्रगान खत्म हो जाने के बाद सभी लोग वहां से चले गए।

बताते चलें कि कर्नाटक के कई जिलों में धारा 144 लगाई गई है। वहां प्रशासन ने लोगों को किसी भी तरह के प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में बीते गुरुवार देश के कई हिस्सों से हिंसा व आगजनी की खबरें आईं। दिल्ली के लाल किला इलाके में पुलिस ने धारा 144 लागू कर दी थी। इसके बावजूद लोग वहां प्रदर्शन के लिए जुटे और फिर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। दिल्ली मेट्रो ने एहतियातन 20 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया था। कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए दिल्ली (कुछ हिस्सों में) व लखनऊ में इंटरनेट सेवाओं पर रोक भी लगाई गई।

क्या है नागरिकता कानून

नागरिकता कानून 1955 में आया था। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है। भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती है। उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने के प्रावधान हैं। संशोधित कानून में पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को नागरिकता मिलने का समय घटाकर 11 साल से 6 साल किया गया है। मुस्लिमों और अन्य देशों के नागरिकों के लिए यह अवधि 11 साल ही रहेगी।  

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