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सीएए हिंसा: उपद्रवियों के पोस्टर हटाने के लिए हाईकोर्ट ने योगी सरकार को दी 10 अप्रैल तक की मोहलत

By बलराम सिंह 
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प्रयागराज। लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के सार्वजनिक स्थानों से पोस्टर हटाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को 10 अप्रैल तक की मोहलत मिल गई है। मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की पीठ ने यह राहत राज्य सरकार की अर्जी पर दी है। जिसमें अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील का हवाला देकर अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग की गई थी।

पीठ ने इससे पहले 9 मार्च को राज्य सरकार को पोस्टर हटा लेने और 16 मार्च को अनुपालन रिपोर्ट महानिबंधक के सामने पेश करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी। शीर्ष अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए वृहदपीठ को संदर्भित कर दिया है।

उस समय दोनों अदालतों में होली का अवकाश चल रहा था। 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के आधार पर सरकार ने आदेश के अनुपालन हेतु और समय देने की मांग की थी। राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर उपद्रवियों के पोस्टर चस्पा करने के कार्य को कानूनी जामा पहुंचाने के लिए अध्यादेश लागू किया है। इसकी वैधानिकता को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर 18 मार्च को सुनवाई होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के आधार पर हाईकोर्ट से और समय देने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने पोस्टर लगाने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि ऐसा कोई कानून नहीं है, जिससे किसी आरोपी का सार्वजनिक स्थान पर फोटो लगाया जाए।कोर्ट ने इसे निजता के अधिकार का हनन मानते हुए 16 मार्च तक पोस्टर हटाकर इसकी रिपोर्ट महानिबंधक के समक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से ही सरकार को अदालत के फैसले का इंतजार था।

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